ग्रामीण महिलाओं में आहार, खाद्य समूह एवं पोषक तत्वों का प्रतिरोधक क्षमता से संबंध: झांसी जनपद (बुंदेलखंड) की झांसी सदर, मऊरानीपुर एवं मोंठ तहसील का अध्ययन
विजया दुबे1*, डॉ. प्रतिभा पाल2
1 शोधार्थी, गृह विज्ञान विभाग, पी.के. विश्वविद्यालय, थानरा, मध्य प्रदेश, भारत
Brajeshtiwari30894@gmail.com
2 सहेयक प्रोफेसर, गृह विज्ञान विभाग, पी.के. विश्वविद्यालय, थानरा, मध्य प्रदेश, भारत
सारांश: प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य झांसी जनपद के बुंदेलखंड क्षेत्र की ग्रामीण महिलाओं में आहार, खाद्य समूहों, पोषक तत्वों तथा प्रतिरोधक क्षमता के बीच संबंध का अध्ययन करना है। अध्ययन के लिए झांसी सदर, मऊरानीपुर एवं मोंठ तहसीलों के चयनित ग्रामीण क्षेत्रों से प्रश्नावली के माध्यम से प्राथमिक आंकड़े एकत्र किए गए। कुल 400 ग्रामीण महिलाओं को अध्ययन में शामिल किया गया तथा उनकी सामाजिक-जनांकिकीय विशेषताओं और आहार संबंधी स्थिति का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में महिलाओं की आयु, परिवार का आकार, शैक्षणिक योग्यता, जाति तथा विवाह की आयु जैसे प्रमुख सामाजिक-जनांकिकीय पहलुओं का अध्ययन किया गया। परिणामों से स्पष्ट होता है कि ग्रामीण महिलाओं की पोषण संबंधी स्थिति उनके सामाजिक एवं पारिवारिक परिवेश से प्रभावित होती है। संतुलित एवं पौष्टिक आहार प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अध्ययन से यह भी स्पष्ट होता है कि ग्रामीण महिलाओं में पोषण संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देने तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उचित उपयोग की आवश्यकता है। महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार, पोषण शिक्षा और उचित खाद्य विकल्पों को बढ़ावा देना आवश्यक है।
मुख्य शब्द: ग्रामीण महिलाएँ, आहार, पोषण, खाद्य समूह, पोषक तत्व, प्रतिरोधक क्षमता, झांसी, बुंदेलखंड।
1. प्रस्तावना
राष्ट्रीय पिता महात्मा गांधी ने कहा था कि "भारत की आत्मा गांव में बसती है।" इसलिए किसी राष्ट्र की प्रगति को यदि मापना हो, तो यह इस बात से तय हो जाएगा कि ग्रामीण महिलाएं संबंधित मानकों पर कितनी खरी उतरती हैं। स्वास्थ्य व पोषण भी इसका अपवाद नहीं है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में कितनी जागरूकता है, वह इस बात पर निर्भर करती है कि क्षेत्र की महिलाएं स्वास्थ्य के प्रति कितनी जागरूक हैं तथा वे पोषक आहार के बारे में कितना जानती हैं।
मानव जीवन में वायु और जल के साथ यदि कोई अन्य आवश्यक तत्व है, तो वह भोजन है। मानव सभ्यता की शुरुआत से ही मनुष्य विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का सेवन करके अपनी भूख मिटाता रहा है, लेकिन धीरे-धीरे उसने पौष्टिक एवं संतुलित भोजन की पहचान की। पौष्टिक भोजन मनुष्य के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। इसके अभाव का प्रभाव महिलाओं पर सर्वाधिक पड़ता है।
महिलाएं किसी भी देश की प्रगति का आधार होती हैं। मनुष्यों में आहार उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संतुलित आहार के माध्यम से प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। समाज में महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों के पोषक आहार पर अधिक ध्यान दिया जाता है, जबकि महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक पोषक आहार की आवश्यकता होती है। भारत में परिवारों में पुरुष-प्रधान व्यवस्था होने के कारण पुरुषों के आहार का विशेष ध्यान रखा जाता है। परिणामस्वरूप, महिलाओं को संतुलित एवं पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता का समुचित विकास नहीं हो पाता।
पोषण-प्रतिरक्षा विज्ञान की धारणा ऐसी स्थिति को दर्शाती है, जिसमें पोषक तत्वों की परिवर्तित आपूर्ति प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को संशोधित करती है। यह अवधारणा नैदानिक रोगियों के स्वास्थ्य में सुधार के प्रयासों से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है। अनेक परिस्थितियों में पोषक तत्वों की बाहरी आपूर्ति की आवश्यकता होती है। वैज्ञानिकों ने उन जैविक तंत्रों का खुलासा किया है, जिनके माध्यम से रेटिनोइक अम्ल, संयुग्मित लिनोलिक अम्ल, एन-3 बहुअसंतृप्त वसीय अम्ल तथा विटामिन A, D और E जैसे प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले यौगिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। इस प्रकार, केवल अपरिहार्य पोषक तत्व प्रदान करने से परे, आहार प्रतिरक्षा प्रणाली को गतिशील रूप से प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
बुंदेलखंड सभी दुर्भाग्यपूर्ण कारणों से सुर्खियों में रहा है। कई वर्षों से यह क्षेत्र सूखे का सामना कर रहा है। साहूकार के जाल के कारण किसान आत्महत्या कर रहे हैं, अपनी जमीन, मवेशी और यहां तक कि अपनी पत्नियों को भी बेच रहे हैं (सिंह, 2010) वार्षिक वर्षा कम (600 से 1400 मिमी) होती है और अक्सर कम अवधि के साथ अनियमित होती है जो अंततः सीमित कृषि उत्पादन के साथ क्षेत्र के बड़े हिस्से को सूखा ग्रस्त बनाती है। उत्तर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की मिट्टी के विपरीत, मिट्टी अत्यधिक गरीब, उथली और कम पानी की लाल मिट्टी से लेकर अत्यधिक उत्पादक, गहरी और अच्छी पानी की काली मिट्टी तक बहुत भिन्नता प्रदर्शित करती है। यदि लगातार सही समय पर बारिश नहीं होती है, तो सूखे से संबंधित संकट जनता को प्रभावित करता है। सिंचाई सुविधाएँ पूरी तरह से एक आपदा हैं और किसी को भी परवाह नहीं है। बेरोजगारी आम बात है और लोग नौकरी की तलाश में पलायन कर रहे हैं। इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए, लेखकों ने क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा की स्थिति के बारे में गहन और विस्तृत मूल्यांकन प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र का चयन किया है। प्रशासनिक रूप से, उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र (जिसे यहाँ यूपी-बुंदेलखंड कहा जाता है) में 7 जिलों के अधिकार क्षेत्र के तहत 48 ब्लॉक शामिल हैं। उत्तर प्रदेश-बुंदेलखंड का भौगोलिक क्षेत्र 2.94 मिलियन हेक्टेयर है जो उस राज्य का लगभग 12.21% है। आर्थिक विचारों और बुनियादी ढांचे के विकास के आधार पर, राज्य के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी क्षेत्रों की तुलना में यूपी-बुंदेलखंड सबसे गरीब क्षेत्र है। यूपी-बुंदेलखंड में राज्य की आबादी का केवल 4.96% हिस्सा है।
बुंदेलखंड क्षेत्र की ग्रामीण महिलाएं, विशेष रूप से झांसी जिले में, आम तौर पर ऐसे आहार का सेवन करती हैं जिनमें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन जैसे आवश्यक मैक्रो और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होती है। इस खराब आहार का सेवन काफी हद तक गरीबी, खराब भोजन की आदतों, पारंपरिक खाना पकाने की प्रथाओं और घर के भीतर भोजन के असमान वितरण के कारण होता है, जहां अक्सर पुरुष सदस्यों को प्राथमिकता दी जाती है।
अपर्याप्त और असंतुलित पोषण शरीर के प्राकृतिक रक्षा तंत्र को कमजोर कर देता है, जिससे महिलाएं लगातार संक्रमण, एनीमिया, थकान और बीमारी से धीमी रिकवरी के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती हैं। यह खराब आहार सेवन और कम प्रतिरक्षा के बीच एक सीधा संबंध स्थापित करता है, जिसकी अध्ययन क्षेत्र की ग्रामीण महिलाओं के बीच वैज्ञानिक रूप से जांच की जानी चाहिए।
आहार प्रतिरक्षा कार्य के सबसे महत्वपूर्ण और परिवर्तनीय निर्धारकों में से एक है। रोजमर्रा के आहार का सेवन प्रतिरक्षा को कैसे प्रभावित करता है, इसकी वैज्ञानिक समझ ग्रामीण महिलाओं की रोग-प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करने में सक्षम व्यावहारिक, कम लागत वाले पोषण उपायों की पहचान करने में मदद कर सकती है, जिससे उनके संक्रमण और बीमारी के बोझ को कम किया जा सकता है।
2. उद्देश्य
- झांसी सदर, मऊरानीपुर एवं मोंठ तहसील के चयनित गांवों की ग्रामीण महिलाओं (18–45 वर्ष) द्वारा उपभोग किए जाने वाले विभिन्न खाद्य समूहों का अध्ययन करना।
- पौष्टिक आहार एवं पोषक तत्वों तथा महिलाओं की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के बीच संबंध का अध्ययन करना।
- उत्तरदाताओं की सामाजिक-जनांकिकीय विशेषताओं (आयु, परिवार का आकार, शैक्षिक योग्यता, जाति एवं विवाह के समय आयु) का वर्णन करना तथा उनका आहार स्थिति से संबंध देखना।
3. अनुसंधान पद्धति
3.1 आंकड़ों का संकलन
प्रस्तुत शोध कार्य को संपादित करने के लिए बुंदेलखंड क्षेत्र की झांसी जिले में ग्रामीण महिलाओं की आहार एवं प्रतिरोधक क्षमता का अध्ययन किया गया है अध्ययन क्षेत्र महिला के पोषण स्तर तथा असंतुलित भोजन से होने वाली बीमारियों तथा प्रतिरोधक क्षमता का व्यापक अध्ययन किया गया है
उपरोक्त सैद्धांतिक पक्षो के सत्यापन हेतु प्रस्तुत शोधकर्ता को संपादित करने के लिए आंकडो और तथ्यों का संकलन किया गया है पोषण स्तर से संबंधित आंकड़ों का संकलन प्रश्नावली विधि से किया गया है अध्ययन क्षेत्र के सामाजिक स्वरूप को ध्यान में रखकर प्रश्नावली का निर्माण किया गया है अध्ययन की सार्थकता को पूरा करने के लिये उपलब्ध आंकड़ों का सहारा भी लिया गया है अध्ययन से सम्बंधित तथ्यों को संकलित करने हेतु पुस्तकालयो, पुस्तकों सरकारी प्रतिवेदनों एवं विभिन्न आयोग की अनुशंसाओं का भी समावेश किया गया है!-
3.2 अध्ययन उपकरण
किसी भी शोध अध्ययन की सफलता शोध कार्य मे प्रयुक्त किए गए उपकरणों की कोटि पर निर्भर करती है अतः यह आवश्यक होता है कि शोधार्थियों शोध समस्या के अनुरूप ही मानकीकृत एवं प्रमाणीकृत उपकरणों का चयन करें जो अनुसंधान के उद्देश्य के अनुरूप हो!
3.3 अध्ययन क्षेत्र
झाँसी भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में स्थिति एक जिला है यह उत्तर प्रदेश एंव मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित है यह 5024 वर्ग किमी. में फैला हुआ है जिसमे 5 तहसीले आती है!
2011 की जनगणना के अनुसार झाँसी जिले की कुल जनसंख्या लगभग 1998603 थी जिसमें लिंगानुपात 1000 पुरुषो पर लगभग 890 महिलाये थी चूकि अभी नवीन जनगणना के आंकड़े उपलब्ध नही है किन्तु अनुमानो के अनुसार जनगणना में अत्यन्त वृद्धि हुयी है 2011 के जनगणना के अनुसार झाँसी जिले में परिवारो की सं. 367779 तथा साक्षरता दर 83% थी इनमें अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्र में निवास करती है जहाँ पर महिलाओं की पोषण स्थिति तथा उनकी प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने पर ध्यान नही दिया जाता है अतः शोधार्थि ने झाँसी जनपद की ग्रामीण महिलाओ में आहार एंव प्रतिरोधक क्षमता का विस्तृत अध्ययन किया है तथा उनके Data के संकलन को तहसील के क्रम अनुसार संकलित किया जा सके!
झांसी सदर तहसील
झांसी सदर तहसील का क्षेत्रफल आधिकारिक रूप से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह 5,024 वर्ग किलोमीटर के कुल जिला क्षेत्रफल के अंतर्गत आने वाली पाँच तहसीलों में से एक है।
कुल गाँव: 148। इनमें से शोधार्थी ने निम्नलिखित गाँवों का चयन किया है— अमरपुर, अम्बाबाय, आरी, अठौंदना, बिजोली एवं बिरगुवा।
कुल आबादी: 885,160 (2011 की जनगणना के अनुसार)।
क्षेत्र का स्वरूप: यह तहसील ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों को सम्मिलित करती है।
शिक्षा का स्तर: शिक्षा का स्तर अपेक्षाकृत उच्च है। 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ की साक्षरता दर लगभग 81.65 प्रतिशत है। यहाँ सीबीएसई, आईसीएसई तथा यूपी बोर्ड से संबद्ध अनेक प्रमुख विद्यालय एवं उच्च शिक्षण संस्थान उपलब्ध हैं।
लिंगानुपात: 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ प्रति 1000 पुरुषों पर 885 महिलाएँ हैं।
बाल लिंगानुपात (0–6 वर्ष): प्रति 1000 लड़कों पर 866 लड़कियाँ दर्ज की गई हैं।
अतः झांसी सदर तहसील एक ऐसा क्षेत्र है, जहाँ ग्रामीण एवं शहरी दोनों प्रकार की सामाजिक-सांस्कृतिक विशेषताएँ विद्यमान हैं, जो अध्ययन के लिए उपयुक्त आधार प्रदान करती हैं।
मऊरानीपुर तहसील
मऊरानीपुर तहसील का क्षेत्रफल लगभग 1291.18 वर्ग किलोमीटर है। यह उप-जिला (तहसील) अपने क्षेत्र के अंतर्गत 148 गांवों को सम्मिलित करता है। 2011 की जनगणना के अनुसार कुल गांवों की संख्या 147 है। इनमें से शोधार्थिनी ने अध्ययन हेतु निम्नलिखित पाँच गांवों का चयन किया है— भिटोरा, बंगरा, रानीपुर, सकरार एवं भानपुरा।
कुल आबादी – 3,01,100।
शिक्षा का स्तर – शिक्षा का स्तर औसत से बेहतर है तथा इसमें निरंतर सुधार हो रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ की साक्षरता दर 76% है, जो राष्ट्रीय औसत 74% से अधिक है।
लिंगानुपात – प्रति 1000 पुरुषों पर लगभग 902 महिलाएँ हैं।
मोंठ तहसील
मोंठ तहसील एक प्रमुख प्रशासनिक क्षेत्र है। इसका क्षेत्रफल लगभग 130.29 वर्ग किलोमीटर है।
कुल गाँव – 219। इनमें से शोधार्थी ने अध्ययन हेतु निम्नलिखित गाँवों का चयन किया है— जैरा, आमखेरा, भरोसा अटरिया तथा अमरा।
कुल आबादी – 2,55,881 से अधिक।
शिक्षा का स्तर – शिक्षा का स्तर मध्यम है, जहाँ ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक तथा माध्यमिक शिक्षा की बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
लिंगानुपात – 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ का लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों पर लगभग 880 से 900 महिलाओं के बीच है।
3.4 अध्ययन का दायरा
वर्तमान अध्ययन भौगोलिक रूप से उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित झांसी जिले के चुनिंदा ग्रामीण क्षेत्रों और गांवों तक ही सीमित है। अध्ययन विशेष रूप से 18 से 45 वर्ष के आयु वर्ग की वयस्क ग्रामीण महिलाओं पर केंद्रित है जो अध्ययन क्षेत्र में चयनित गांवों की स्थायी निवासी हैं। शोध का दायरा मुख्य रूप से ग्रामीण महिलाओं की प्रतिरक्षा स्थिति के साथ-साथ आहार और भोजन के सेवन के पैटर्न के मूल्यांकन तक सीमित है, जिससे स्वास्थ्य के अन्य व्यापक पहलुओं जैसे प्रजनन स्वास्थ्य स्थितियों, नैदानिक रोग प्रोफाइलिंग और पुरानी बीमारी के पैटर्न को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इस अध्ययन को यह समझने के लिए तैयार किया गया है कि कैसे आहार की आदतें चयनित क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं में प्रतिरक्षा को प्रभावित करती हैं। इसके अलावा, अध्ययन की अवधि, जिसमें क्षेत्र सर्वेक्षण, डेटा संग्रह और डेटा विश्लेषण शामिल हैं, एक शैक्षणिक वर्ष की अवधि में किया गया था, जो परिभाषित अनुसंधान ढांचे के भीतर डेटा का व्यवस्थित संग्रह और व्याख्या सुनिश्चित करता है।
4. डेटा विश्लेषण और परिणाम
प्रस्तुत अध्याय में झांसी जनपद के चयनित ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के आहार, पोषण संबंधी स्थिति तथा सामाजिक-जनांकिकीय विशेषताओं से संबंधित एकत्रित आंकड़ों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। अध्ययन में झांसी सदर, मऊरानीपुर एवं मोंठ तहसीलों के चयनित गांवों को शामिल किया गया है तथा प्रश्नावली के माध्यम से प्राप्त प्राथमिक आंकड़ों के आधार पर उत्तरदाताओं की विभिन्न विशेषताओं का अध्ययन किया गया है। अध्ययन के प्रमुख उद्देश्यों में महिलाओं द्वारा उपभोग किए जाने वाले विभिन्न खाद्य समूहों का अध्ययन, पौष्टिक आहार एवं पोषक तत्वों तथा प्रतिरोधक क्षमता के बीच संबंध का अध्ययन तथा सामाजिक-जनांकिकीय विशेषताओं और आहार स्थिति के बीच संबंध का अध्ययन करना शामिल है।
परिणामों को मुख्य रूप से उत्तरदाताओं की आयु, परिवार के आकार, शैक्षिक योग्यता, जातिगत संरचना तथा विवाह के समय आयु के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों में कुल 400 उत्तरदाताओं को शामिल किया गया है। विभिन्न तालिकाओं एवं ग्राफों के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों को प्रतिशत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे अध्ययन क्षेत्र की ग्रामीण महिलाओं की सामाजिक एवं जनांकिकीय स्थिति को स्पष्ट रूप से समझा जा सके। इसके साथ ही, अध्ययन की पृष्ठभूमि में पोषण और प्रतिरोधक क्षमता के बीच संभावित संबंध को ध्यान में रखते हुए परिणामों की व्याख्या की गई है।
चित्र 1: महिलाओं में पोषण परिणामों की स्थिति (15-49 वर्ष)
तालिका 1: महिलाओं में पोषण संबंधी परिणामों का बोझ (15-49 वर्ष) 2020
क्रम संख्या | पोषण / स्वास्थ्य संकेतक | महिलाओं की संख्या (15–49 वर्ष) |
1 | कम वज़न | 124,182 |
2 | ज़्यादा वज़न / मोटापा | 83,563 |
3 | हाई ब्लड प्रेशर | 103,872 |
4 | डायबिटीज़ | 35,111 |
5 | एनीमिया (गर्भवती न होने वाली महिलाएँ) | 275,245 |
6 | एनीमिया (गर्भवती महिलाएँ) | 18,481 |
7 | कुल गर्भवती महिलाएँ | 51,783 |
8 | कुल महिलाएँ (15–49 साल) | 663,722 |
रिपोर्ट के अनुसार, झांसी जिले में प्रजनन आयु वर्ग की कुल 663,722 महिलाएं हैं। उनमें से 51,783 महिलाओं को संदर्भ अवधि के दौरान गर्भवती बताया गया था। जिले में 38,020 जीवित जन्म दर्ज किए गए, जिनमें से 37,763 संस्थागत प्रसव थे, जो सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत संस्थागत स्वास्थ्य देखभाल उपयोग और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच का संकेत देते हैं। जिले का लिंगानुपात प्रति 1,000 पुरुषों पर 946 महिलाएं है, जो राज्य के औसत की तुलना में अपेक्षाकृत संतुलित लिंग संरचना को दर्शाता है।
तालिका 2: उत्तरदाताओं की आयु के आधार पर वर्गीकरण
क्र•स• | उत्तरदाताओं की आयु का विवरण | उत्तरदाताओं की संख्या | प्रतिशत |
1 | 15 से 25 वर्ष | 42 | 10.5% |
2 | 26 से 35 वर्ष | 95 | 23.75% |
3 | 36 से 45 वर्ष | 143 | 35.75% |
4 | 46 से 55 वर्ष | 90 | 22.5% |
5 | 56 से अधिक | 30 | 7.5% |
योग | 400 | 100 |
ग्राफ 2: उत्तरदाताओं की आयु के आधार पर वर्गीकरण
उपरोक्त तालिका 2 की विश्लेषण में उत्तरदाताओं का आयु वर्ग के आधार पर अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि 10.5 प्रतिशत उत्तरदाता 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित है 23.75 प्रतिशत उत्तरदाता 26 से 35 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित है 35.75 प्रतिशत उत्तरदाता 36 से 45 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित है 22.5 प्रतिशत उत्तरदाता 46 से 55 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित है तथा 7.5 प्रतिशत उत्तरदाता 56 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से संबंधित है |
तालिका 3: उत्तरदाताओ का परिवार के आकार के आधार पर वर्गीकरण
क्र•स• | उत्तरदाताओ के परिवार के आकार का विवरण | उत्तरदाताओ की संख्या | प्रतिशत |
1 | छोटा आकार (2 से 4 सदस्य ) | 172 | 43 |
2 | मध्यम आकार (5 से 7 सदस्य ) | 146 | 36.5 |
3 | बडा आकार ( 7से अधिक ) | 82 | 20.5 |
योग- | 400 | 100% |
उपरोक्त तालिका 3 के विश्लेषण में उत्तरदाताओं के परिवार के आकार के आधार पर अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि 43% उत्तरदाताओं के परिवार का आकार छोटा है 36.5 उत्तरदाताओं के परिवार का आकार मध्यम है 20.5% उत्तरदाताओं के परिवार का आकार बड़ा है|
ग्राफ 3: उत्तरदाताओ का परिवार के आकार के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 4: उत्तरदाताओं महिला की शिक्षा योग्यता के आधार पर वर्गीकरण
क्र. स. | उत्तरदाताओ की आयु का विवरण | उत्तरदाताओं की संख्या | प्रतिशत |
1 | प्राथमिक स्तर | 52 | 13 |
2 | माध्यमिक स्तर तक | 247 | 61.75 |
3 | स्नातक/ स्नातकोत्तर स्तर तक | 96 | 24 |
4 | उच्च स्तर | 00 | 00 |
योग- | 400 | 100 |
उपरोक्त तालिका के विश्लेषण में उत्तरदाताओं की शैक्षिक योग्यता के आधार पर अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि 13 प्रतिशत उत्तरदाताओं की शैक्षिक पृष्ठभूमि प्राथमिक स्तर की पाई गई है, 61.75 प्रतिशत उत्तरदाताओं की शैक्षिक पृष्ठभूमि माध्यमिक स्तर तक की पाई गई है तथा 24 प्रतिशत उत्तरदाताओं की शैक्षिक पृष्ठभूमि स्नातक/स्नातकोत्तर स्तर की पाई गई है। यह स्तर पोषण संबंधी जागरूकता के लिए आवश्यक माना जा सकता है।
ग्राफ 4: उत्तरदाताओं महिला की शिक्षा योग्यता के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 5: उत्तरदाताओ का जाति के आधार पर वर्गीकरण
क्र. स. | उत्तर दाताओ की जाति | उत्तरदाताओ की संख्या | प्रतिशत |
1 | सामान्य जाति | 114 | 28.50 |
2 | पिछडी जाति | 148 | 37 |
3 | अनुसूचित जाति | 92 | 23 |
4 | अन्य | 46 | 11.5 |
योग | 400 | 100 |
ग्राफ 5: उत्तरदाताओ का जाति के आधार पर वर्गीकरण
उपरोक्त तालिका 5 के विश्लेषण में महिला उत्तरदाताओं का जाति के आधार पर अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि 28.5 प्रतिशत महिला उत्तरदाता सामान्य वर्ग से हैं, 37 प्रतिशत महिला उत्तरदाता अन्य पिछड़ी जाति से हैं, 23 प्रतिशत उत्तरदाता अनुसूचित जाति से हैं तथा 11.5 प्रतिशत महिला उत्तरदाता अन्य जातियों से संबंधित हैं।
तालिका 6: उत्तरदाताओं का विवाह के समय आयु के आधार पर वर्गीकरण
क्रं•सं• | उत्तरदाताओं के विवाह के समय आयु का विवरण | उत्तरदाताओ की संख्या | प्रतिशत |
1 | 15 से 20 वर्ष | 96 | 24 |
2 | 21 से 25 वर्ष | 182 | 45.5 |
3 | 26 से 30 वर्ष | 89 | 22.25 |
4 | 31 से 35 वर्ष | 29 | 7.25 |
5 | 35 से अधिक | 4 | 1 |
योग- | 400 | 100 |
ग्राफ 6: उत्तरदाताओं का विवाह के समय आयु के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 6 के आँकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि महिला उत्तरदाताओं का विवाह के समय आयु के आधार पर अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि 24 प्रतिशत महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 15 से 20 वर्ष थी, 45.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 21 से 25 वर्ष थी, 22.25 प्रतिशत महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 26 से 30 वर्ष थी, 7.25 प्रतिशत उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 31 से 35 वर्ष थी तथा 1 प्रतिशत उत्तरदाताओं की आयु 35 वर्ष से अधिक थी।
तालिका 7: उत्तरदाताओं की आयु के आधार पर वर्गीकरण
क्रं• सं• | उत्तरदाताओं की आयु का विवरण | उत्तरदाताओं की संख्या | प्रतिशत |
1 | 15 से 25 वर्ष | 40 | 10% |
2 | 26 से 35 वर्ष | 87 | 21% |
3 | 36 से 45 वर्ष | 153 | 38% |
4 | 46 से 55 वर्ष | 100 | 25% |
5 | 56 से अधिक | 20 | 5% |
योग- | 400 | 100 |
ग्राफ 7: उत्तरदाताओं की आयु के आधार पर वर्गीकरण
उपरोक्त तालिका 7 के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि उत्तरदाताओं का आयु वर्ग के आधार पर अध्ययन करने पर 10 प्रतिशत उत्तरदाता 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित हैं। 21 प्रतिशत उत्तरदाता 26 से 35 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित हैं। 38 प्रतिशत उत्तरदाता 36 से 45 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित हैं। 25 प्रतिशत उत्तरदाता 46 से 55 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित हैं, तथा 5 प्रतिशत उत्तरदाता 56 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से संबंधित हैं।
तालिका 8: उत्तरदाताओ का परिवार के आकार के आधार पर वर्गीकरण
क्रं• सं | उत्तरदाताओ के परिवार के आकार का विवरण | उत्तरदाताओ की संख्या | प्रतिशत |
1 | छोटा आकार (2 से 4 सदस्य) | 160 | 40% |
2 | मध्यम आकार (5 से 7 सदस्य) | 140 | 35% |
3 | बडा आकार (7 से अधिक) | 100 | 25% |
योग- | 400 | 100 |
ग्राफ 8: उत्तरदाताओ का परिवार के आकार के आधार पर वर्गीकरण
उपरोक्त तालिका 8 के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि उत्तरदाताओं के परिवार के आकार के आधार पर अध्ययन करने पर 40% उत्तरदाताओं के परिवार का आकार छोटा है, 35% उत्तरदाताओं के परिवार का आकार मध्यम है तथा 25% उत्तरदाताओं के परिवार का आकार बड़ा है।
तालिका 9: उत्तरदाताओं की शैक्षिक योग्यता के आधार पर वर्गीकरण
क्रं• सं | उत्तरदाताओं की शिक्षा योग्यता का विवरण | उत्तरदाताओं की संख्या | प्रतिशत |
1 | प्राथमिक स्तर | 60 | 15% |
2 | माध्यमिक स्तर तक | 200 | 50% |
3 | स्नातक/ स्नातकोत्तर स्तर तक | 130 | 32.5% |
4 | उच्च स्तर | 10 | 2.5% |
योग- | 400 | 100 |
ग्राफ 9: उत्तरदाताओं की शैक्षिक योग्यता के आधार पर वर्गीकरण
उपरोक्त तालिका के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि उत्तरदाताओं की शैक्षिक योग्यता के आधार पर अध्ययन करने पर 50% उत्तरदाताओं की शैक्षिक पृष्ठभूमि माध्यमिक स्तर की पाई गई है, 32.5% उत्तरदाताओं की शैक्षिक पृष्ठभूमि स्नातक स्तर की पाई गई है, तथा 2.5% उत्तरदाताओं की शैक्षिक पृष्ठभूमि उच्च शिक्षा स्तर की पाई गई है। शिक्षा का स्तर पोषण संबंधी जागरूकता के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
तालिका 10: उत्तरदाताओ का जाति के आधार पर वर्गीकरण
क्र. स. | उत्तर दाताओ की जाति | उत्तरदाताओ की संख्या | प्रतिशत |
1 | सामान्य जाति | 60 | 15% |
2 | पिछडी जाति | 180 | 45% |
3 | अनुसूचित जाति | 160 | 40% |
4 | अन्य | 00 | 00 |
योग- | 400 | 100 |
ग्राफ 10: उत्तरदाताओ का जाति के आधार पर वर्गीकरण
उपरोक्त तालिका 10 के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि महिला उत्तरदाताओं का जाति के आधार पर अध्ययन करने पर 15% महिला उत्तरदाता सामान्य वर्ग से हैं, 45% महिला उत्तरदाता अन्य पिछड़ी जाति से हैं, 40% महिला उत्तरदाता अनुसूचित जाति से हैं तथा 6% महिला उत्तरदाता अन्य जाति से संबंधित हैं।
तालिका 11: उत्तरदाताओं का विवाह के समय आयु के आधार पर वर्गीकरण
क्रं•सं• | उत्तरदाताओं के विवाह के समय आयु का विवरण | उत्तरदाताओ की संख्या | प्रतिशत |
1 | 15 से 20 वर्ष | 195 | 48.75% |
2 | 21 से 25 वर्ष | 105 | 26.25% |
3 | 26 से 30 वर्ष | 80 | 20% |
4 | 31 से 35 वर्ष | 20 | 5% |
5 | 35 वर्ष से अधिक | 00 | 00% |
योग- | 400 | 100 |
ग्राफ 11: उत्तरदाताओं का विवाह के समय आयु के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 11 के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि महिला उत्तरदाताओं का विवाह के समय आयु के आधार पर अध्ययन करने पर 48.75% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 15 से 20 वर्ष थी। 26.25% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 21 से 25 वर्ष थी। 20% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 26 से 30 वर्ष थी। 5% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 31 से 35 वर्ष थी, जबकि 35 वर्ष से अधिक आयु में विवाह करने वाली महिला उत्तरदाताओं का प्रतिशत 0% पाया गया।
तालिका 12: उत्तरदाताओं की आयु के आधार पर वर्गीकरण
क्रं• सं• | उत्तरदाताओं की आयु का विवरण | उत्तरदाताओं की संख्या | प्रतिशत |
1 | 15 से 25 वर्ष | 47 | 11.75% |
2 | 26 से 35 वर्ष | 100 | 25% |
3 | 36 से 45 वर्ष | 122 | 30.5% |
4 | 46 से 55 वर्ष | 95 | 23.7% |
5 | 56 से अधिक | 31 | 7.75% |
योग- | 400 | 100 |
ग्राफ 12: उत्तरदाताओं की आयु के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 13: उत्तरदाताओ का परिवार के आकार के आधार पर वर्गीकरण
क्रं• सं | उत्तरदाताओ के परिवार के आकार का विवरण | उत्तरदाताओ की संख्या | प्रतिशत |
1 | छोटा आकार (2 से 4सदस्य) | 145 | 36.2% |
2 | मध्यम आकार (5 से 7सदस्य) | 175 | 43.7% |
3 | बडा आकार (7से अधिक) | 80 | 20% |
योग- | 400 | 100 |
ग्राफ 13: उत्तरदाताओ का परिवार के आकार के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 14: उत्तरदाताओं की आयु के आधार पर वर्गीकरण
क्रं• सं | उत्तरदाताओ की आयु का विवरण | उत्तरदाताओं की संख्या | प्रतिशत |
1 | प्राथमिक स्तर | 70 | 17.5% |
2 | माध्यमिक स्तर तक | 180 | 45% |
3 | स्नातक/ स्नातकोत्तर स्तर तक | 150 | 37.5% |
4 | उच्च स्तर | 00 | 00% |
योग- | 400 | 100 |
ग्राफ 14: उत्तरदाताओं की आयु के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 15: उत्तरदाताओ का जाति के आधार पर वर्गीकरण
क्र. स. | उत्तर दाताओ की जाति | उत्तरदाताओ की संख्या | प्रतिशत |
1 | सामान्य जाति | 75 | 18.75% |
2 | पिछडी जाति | 165 | 41.25% |
3 | अनुसूचित जाति | 145 | 36.25% |
4 | अन्य | 15 | 3.25% |
योग- | 400 | 100 |
ग्राफ 15: उत्तरदाताओ का जाति के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 16: उत्तरदाताओं का विवाह के समय आयु के आधार पर वर्गीकरण
क्रं•सं• | उत्तरदाताओं के विवाह के समय आयु का विवरण | उत्तरदाताओ की संख्या | प्रतिशत |
1 | 15 से 20 वर्ष | 165 | 41.25% |
2 | 21 से 25 वर्ष | 135 | 33.75% |
3 | 26 से 30 वर्ष | 75 | 18.75% |
4 | 31 से 35 वर्ष | 20 | 5% |
5 | 35 वर्ष से अधिक | 05 | 1.25% |
योग- | 400 | 100 |
ग्राफ 16: उत्तरदाताओं का विवाह के समय आयु के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 16 के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि महिला उत्तरदाताओं का विवाह के समय आयु के आधार पर अध्ययन करने पर 41.25% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 15 से 20 वर्ष थी। 33.75% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 21 से 25 वर्ष थी। 18.75% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 26 से 30 वर्ष थी। 5% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 31 से 35 वर्ष थी, जबकि 1.25% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 35 वर्ष से अधिक थी।
5. निष्कर्ष
प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य झांसी जनपद के चयनित ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के आहार, पोषण तथा प्रतिरोधक क्षमता से संबंधित स्थिति का अध्ययन करना था। अध्ययन में झांसी सदर, मऊरानीपुर एवं मोंठ तहसीलों के चयनित गांवों की ग्रामीण महिलाओं को अध्ययन की इकाई के रूप में शामिल किया गया। अध्ययन की पृष्ठभूमि से स्पष्ट होता है कि ग्रामीण महिलाओं के पोषण पर गरीबी, सीमित खाद्य उपलब्धता, पारंपरिक भोजन संबंधी व्यवहार तथा परिवार के भीतर भोजन के असमान वितरण जैसे सामाजिक एवं आर्थिक कारकों का प्रभाव पड़ सकता है।
अध्ययन में कुल 400 उत्तरदाताओं से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर उनकी सामाजिक-जनांकिकीय विशेषताओं का विश्लेषण किया गया। परिणामों से पता चलता है कि उत्तरदाताओं में विभिन्न आयु वर्ग, परिवार के आकार, शैक्षिक स्तर तथा सामाजिक समूहों का प्रतिनिधित्व पाया गया। आयु संबंधी आंकड़ों में 36–45 वर्ष का समूह प्रमुख रहा, जबकि परिवार के आकार के संबंध में छोटे एवं मध्यम आकार के परिवारों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व पाया गया। शैक्षिक स्तर के आंकड़ों में अधिकांश उत्तरदाता माध्यमिक अथवा उससे ऊपर की शिक्षा प्राप्त कर चुके थे। जातिगत संरचना में अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अनुसूचित जाति की महिलाओं का उल्लेखनीय प्रतिनिधित्व रहा। विवाह के समय आयु के आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि बड़ी संख्या में महिलाओं का विवाह अपेक्षाकृत कम आयु में हुआ था। अध्ययन की समग्र पृष्ठभूमि यह दर्शाती है कि संतुलित एवं पर्याप्त आहार महिलाओं के स्वास्थ्य और प्रतिरोधक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम तथा विभिन्न विटामिनों जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की पर्याप्त उपलब्धता महिला स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए ग्रामीण महिलाओं की पोषण स्थिति में सुधार के लिए संतुलित आहार, पोषण संबंधी जागरूकता तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है।
अतः यह अध्ययन झांसी जनपद की ग्रामीण महिलाओं की पोषण संबंधी स्थिति को समझने के लिए उपयोगी आधार प्रदान करता है। भविष्य में आहार सेवन, विशिष्ट पोषक तत्वों की मात्रा तथा प्रतिरोधक क्षमता के प्रत्यक्ष जैविक संकेतकों के बीच संबंध का अधिक विस्तृत अध्ययन किया जाना आवश्यक है, ताकि ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रभावी एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल पोषण संबंधी हस्तक्षेप विकसित किए जा सकें।
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