1.
समकालीन हिन्दी उपन्यास में साम्प्रदायिकता: भावनाएँ और आंतरिक जीवन का प्रतिबिम्ब: समकालीन हिन्दी उपन्यास. JASRAE. 2017;13(2):570-572. Accessed July 15, 2026. https://www.ignited.in/index.php/jasrae/article/view/6858