[1]
“भारतीय समाज के सन्दर्भ में सामाजिक न्याय की प्रासंगिकता: व्यापकता और धार्मिकता के सन्दर्भ में”, JASRAE, vol. 19, no. 1, pp. 384–387, Jan. 2022, Accessed: June 17, 2026. [Online]. Available: https://www.ignited.in/index.php/jasrae/article/view/13740