p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों द्वारा उत्प्रेरित संशोधित ग्रोक-ब्लैकबर्न-बिएनायमे (GBB) अभिक्रिया के माध्यम से इमिडाज़ो[4,5-c]आइसोक्विनोलिन, इमिडाज़ो[4,5-c][2,7]नैफ्थिरीडीन तथा इमिडाज़ो[4,5-b]थिएनो[2,3-d]पाइरिडीन से स्पाइरोवलयित स्पाइरोक्सिंडोलों का संश्लेषण

 

अनामिका प्रजापति1*, उमेश चेजारा2

1 सहायक प्रोफेसर, रसायन विज्ञान विभाग, सरकारी विज्ञान महाविद्यालय, सीकर, राजस्थान, भारत

aonu27@gmail.com

2 व्याख्याता, भौतिकी विभाग, प्रधानमंत्री श्री एमजीजीएस जीनी, सूरजगढ़, झुंझुनू, राजस्थान, भारत

सारांश: मेरे शोध कार्य में p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों द्वारा उत्प्रेरित एक प्रभावी संश्लेषणात्मक अभिक्रिया को प्रस्तुत किया गया है, जिसमें ग्रोक-ब्लैकबर्न-बिएनायमे (GBB) अभिक्रिया के रूपांतरण द्वारा इमिडाज़ो[4,5-c]आइसोक्विनोलिन, इमिडाज़ो[4,5-c][2,7]नैफ्थिरीडीन तथा इमिडाज़ो[4,5-b]थिएनो[2,3-d]पाइरिडीन से स्पाइरोवलयित स्पाइरोक्सिंडोलों का संश्लेषण किया गया। यह अभिसारी संश्लेषणात्मक अभिक्रिया उच्च बंध-निर्माण दक्षता के साथ संरचनात्मक जटिलता एवं आणविक विविधता को एकल आणविक ढाँचे में समाहित करती है।

प्रस्तुत संश्लेषणात्मक विधि में 2-एमिनोबेंजोथायाज़ोल, साइक्लोहेक्सिल/तृतीयक ब्यूटिल आइसोसाइनाइड तथा एरोमैटिक/ विषमचक्रीय एरोमैटिक ऐल्डिहाइडों के मध्य आइसोसाइनाइड-आधारित ग्रोक-ब्लैकबर्न-बिएनायमे अभिक्रिया के पश्चात EtOH माध्यम में नाभिकिस्नेहि चक्रीकरण अभिक्रिया सम्पन्न की गई। जल को एक अत्यंत किफायती, सुरक्षित एवं अहानिकर हरित विलायक के रूप में प्रयुक्त किया गया। p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों की पुनर्प्राप्ति एवं पुनः उपयोग की क्षमता संभावना इस संश्लेषणात्मक प्रोटोकॉल को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाती है।

मुख्य शब्द: p-TSA-संशोधित TiO नैनोकण; इमिडाज़ो[4,5-c]आइसोक्विनोलिन; इमिडाज़ो[4,5-c][2,7]नैफ्थिरीडीन; इमिडाज़ो[4,5-b]थिएनो[2,3-d]पाइरिडीन; ग्रोक-ब्लैकबर्न-बिएनायमे अभिक्रिया (GBB)

प्रस्तावना

वर्तमान में नैनोकण उत्प्रेरित पर्यावरण-अनुकूल आइसोसाइनाइड-आधारित बहुघटक अभिक्रियाएँ (Isocyanide-Based Multicomponent Reactions, IMCRs) विविध एवं जटिल अणुओं के संश्लेषण के लिए एक प्रभावशाली रणनीति के रूप में उभरी हैं, जिनमें एक साथ अनेक बंधों का निर्माण से एकल आणविक ढाँचे में औषधीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण विषम चक्रीय उपसंरचनाओं को समाहित करने वाले  संरचनात्मक रूपांतरण सम्मिलित होते हैं

चित्र 1. थायाडायाज़ोल/थायाज़ोल तथा स्पाइरोऑक्सिन्डोल अंश युक्त जैवसक्रिय यौगिक।

हाल ही में, आइसोसाइनाइड-आधारित बहुघटक अभिक्रियाओं, विशेष रूप से ग्रोक-ब्लैकबर्न-बिएनायमे (Groebke–Blackburn–Bienaymé, GBB) अभिक्रिया [1-3], ने कार्बनिक संश्लेषण में विशेष रुचि आकर्षित की है। इसका प्रमुख कारण सरलता से उपलब्ध ऐल्डिहाइड, आइसोसाइनाइड तथा एमिडीन क्रियाकरको से चिकित्सीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण एवं संरचनात्मक रूप से विविध नाइट्रोजन-युक्त विषमचक्रीय यौगिकों के संश्लेषण की क्षमता है।

शोध कार्य में पर्यावरण-अनुकूल, पुनर्प्राप्य एवं पुनःप्रयोग योग्य p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों का उत्प्रेरक के रूप में उपयोग किया गया। इन नैनोकणों की सहायता से एथेनॉल माध्यम में 2-एमिनोबेंजोथायाज़ोल/2-अमीनो-1,3,4-थायाडायाज़ोल, साइक्लोहेक्सिल/तृतीयक-ब्यूटिल आइसोसाइनाइड तथा एरोमैटिक/विषमएरोमैटिक ऐल्डिहाइडों की त्रिघटक अभिक्रिया द्वारा इमिडाज़ोथायाज़ोल एवं इमिडाज़ोथायाडायाज़ोल का संश्लेषण किया गया।

जैविक रूप से सक्रिय विषमचक्रीय संरचनाओं की उपयोगिता तथा चिकित्सीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण विषमचक्रीय यौगिकों के संश्लेषण पर हमारे निरंतर अनुसंधान [4-9] से प्रेरित होकर, वर्तमान अध्ययन में ग्रोक-ब्लैकबर्न अभिक्रिया के उत्पादों का पश्च-संशोधन द्वारा किया गया। इसमें GBB उत्पादों की आइसैटिन के साथ p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों द्वारा उत्प्रेरित अभिक्रिया EtOH माध्यम में कराई गई, जिससे औषधीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण विषमचक्रीय संरचनाओं से जुड़े स्पाइरोऑक्सिन्डोल यौगिकों का संश्लेषण किया गया। (चित्र 2).  

चित्र 2. औषधीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण विषमचक्रीय तंत्रों के साथ C-3 पर स्पाइरो-समाविष्ट स्पाइरोऑक्सिन्डोल।.

उत्प्रेरक का विस्तृत अभिलक्षणन:

 FT-IR, पाउडर X-किरण विवर्तन (XRD) तथा स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (SEM) तकनीकों द्वारा किया गया। TiO तथा p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों के XRD पैटर्न से दोनों पदार्थों की संरचनात्मक विशेषताओं की तुलना की गई। p-TSA-संशोधित TiO के XRD विश्लेषण में विशिष्ट विवर्तन संकेत प्राप्त हुए तथा डेबाई–शेरर समीकरण द्वारा इसका औसत कण आकार लगभग 20.88 nm निर्धारित किया गया।

FT-IR विश्लेषण में लगभग 3200–3500 cm¹ पर अवशोषण बैंड अवशोषित जल की उपस्थिति के कारण प्राप्त हुए। 1200 cm¹ से कम का व्यापक बैंड Ti–O–Ti बंध से संबंधित पाया गया, जबकि लगभग 555 cm¹ का संकेत Ti–O बंध के स्ट्रेचिंग कंपन को दर्शाता है। p-TSA-संशोधित TiO के स्पेक्ट्रम में 1137–1224 तथा 1006–1065 cm¹ के संकेत क्रमशः S=O के असममित एवं सममित स्ट्रेचिंग कंपन से संबंधित हैं। इसके अतिरिक्त, 670–834 cm¹ के क्षेत्र में S–O स्ट्रेचिंग संकेत प्राप्त हुआ। ये संकेत –SOH समूह की उपस्थिति तथा TiO नैनोकणों के सफल p-TSA संशोधन की पुष्टि करते हैं। (चित्र 3,4)

चित्र 3. TiO नैनोकणों तथा p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों के X-किरण विवर्तन (XRD) प्रतिरूप।

चित्र 4. TiO नैनोकणों तथा p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों के एफटी-आईआर (FT-IR) स्पेक्ट्रा।

 

SEM विश्लेषण

TiO तथा p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों के SEM चित्र में प्रदर्शित किए गए हैं। चित्र 6 में दर्शाया गया 1 μm का स्केल सूक्ष्म आकार के एकत्रित कणिकाओं (agglomerated granules) के निर्माण को दर्शाता है। ये सूक्ष्म आकार की कणिकाएँ क्रमशः TiO तथा p-TSA-संशोधित TiO के नैनो-आकार के क्रिस्टलाइटों, जिनका औसत कण आकार क्रमशः 12.175 nm तथा 20.88 nm है, से निर्मित पाई गईं। इन कण आकारों का निर्धारण डेबाई–शेरर समीकरण द्वारा किया गया। ( चित्र-5 )

चित्र 5. TiO नैनोकणों तथा p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों के SEM चित्र।

 

अभिक्रिया परिस्थितियों का अनुकूलन:

GBB उत्पादों का संश्लेषण 2-एमिनोबेंजोथायाज़ोल/2-अमीनो-1,3,4-थायाडायाज़ोल, साइक्लोहेक्सिल/तृतीयक-ब्यूटाइल आइसोसाइनाइड तथा एरोमैटिक/विषमएरोमैटिक ऐल्डिहाइडों की अभिक्रिया द्वारा किया गया। इस अभिक्रिया में पुनर्प्राप्य एवं पुनःप्रयोग योग्य p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों को उत्प्रेरक के रूप में तथा EtOH माध्यम का उपयोग किया गया।

अभिक्रिया परिस्थितियों के अनुकूलन के लिए प्रारंभ में 2-एमीनो-1,3,4-थायाडायाज़ोल, साइक्लोहेक्सिल आइसोसाइनाइड तथा थायोफीन-2-कार्बैल्डिहाइड की अभिक्रिया को मॉडल अभिक्रिया के रूप में चुना गया। इसके आधार पर विभिन्न अभिक्रिया परिस्थितियों का अध्ययन कर उपयुक्त परिस्थितियाँ निर्धारित की गईं । (स्कीम 1)

 स्कीम 1: मॉडल अभिक्रिया

तालिका 1: अभिक्रिया परिस्थितियों का अनुकूलन

क्र.सं.        

उत्प्रेरक

विलायकb

समय

 

लब्धि (%)

 

1.

 p-TSA (15 मोल %)

मेथनॉल

6 घंटे

 

72

 

2.

ट्राइफ्लुओरोएसिटिक अम्ल (15 मोल %)

मेथनॉल

5 घंटे

 

70

 

3.

 TiO2 (10 मोल %

मेथनॉल

4 घंटे

 

77

 

4.

TiO2 NPs (10 mol %)

मेथनॉल

2 घंटे

 

88

 

5.

p-TSA-संशोधित TiO नैनोकण (5 मोल %)

मेथनॉल

1 घंटे

 

92

 

6.

p-TSA-संशोधित TiO नैनोकण (5 मोल %)

जल

50 मिनट

 

94

 

7.

p-TSA-संशोधित TiO नैनोकण (5 मोल %)

1,4-डाइऑक्सेन

3 घंटे

 

83

 

8.

p-TSA-संशोधित TiO नैनोकण (5 मोल %)

डाइक्लोरोएथेन

2.5 घंटे

 

84

 

9.

p-TSA-संशोधित TiO नैनोकण (5 मोल %)

टेट्राहाइड्रोफ्यूरान (THF)

3.5 घंटे

 

84

 

10.

p-TSA-संशोधित TiO नैनोकण (10 मोल %)

EtOH

35 मिनट

 

97

 

11.

p-TSA-संशोधित TiO नैनोकण (15 मोल %)

जल

35 मिनट

 

97

 

 

बोल्ड पंक्ति अभिक्रिया के लिए अनुकूलित परिस्थितियों को दर्शाती है।

2-एमिनोबेंजोथायाज़ोल (1 mmol), साइक्लोहेक्सिल आइसोसाइनाइड (1 mmol) तथा थायोफीन-2-कार्बैल्डिहाइड (1 mmol) को TLC द्वारा अभिक्रिया पूर्ण होने तक 70°C पर हिलाया गया।

विलायक की मात्रा 2.0 mL थी।

शुद्धिकरण के पश्चात प्राप्त पृथक लब्धि।

अभिक्रिया परिस्थितियों का अनुकूलन एवं परिणाम:

 

प्रारंभ में मॉडल अभिक्रिया को p-TSA तथा ट्राइफ्लुओरोएसिटिक अम्ल जैसे अम्लीय उत्प्रेरकों की उपस्थिति में मेथनॉल में कराया गया, जिसमें मध्यम लब्धि प्राप्त हुई। TiO नैनोकणों ने कम समय में अपेक्षाकृत बेहतर लब्धि प्रदान की। इसके बाद p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों का उपयोग करने पर असंशोधित TiO की तुलना में अधिक उत्प्रेरकीय दक्षता तथा बेहतर लब्धि प्राप्त हुई।

विभिन्न विलायकों के अध्ययन से ज्ञात हुआ कि p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों की दक्षता प्रोटिक विलायकों में अधिक थी तथा ETOH माध्यम में सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त हुआ। उत्प्रेरक की मात्रा के अनुकूलन में 10 मोल % p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों से अधिकतम लब्धि प्राप्त हुई।

GBB अभिक्रिया द्वारा उत्पाद प्राप्त करने के बाद पश्च संशोधन द्वारा स्पाइरोऑक्सिन्डोलों की उत्कृष्ट लब्धि प्राप्त हुई।  इसके विपरीत, वाणिज्यिक TiO तथा असंशोधित TiO नैनोकणों से पश्च संशोधन  में अंतिम उत्पाद की बहुत कम लब्धि प्राप्त हुई।

स्कीम 2: मॉडल अभिक्रिया

उत्प्रेरक की पुनर्प्राप्ति एवं पुनःप्रयोगशीलता

इसके अतिरिक्त, अनुकूलित अभिक्रिया परिस्थितियों में उत्प्रेरक की पुनर्प्राप्ति एवं पुनःप्रयोगशीलता का अध्ययन किया गया। अभिक्रिया पूर्ण होने के बाद उत्प्रेरक को छनन द्वारा आसानी से पुनर्प्राप्त किया गया। इसके बाद किसी भी अधिशोषित कार्बनिक यौगिक को हटाने के लिए इसे डाइएथिल ईथर से चार बार धोया गया तथा पहले निर्वात में और तत्पश्चात ओवन में सुखाया गया। पुनर्प्राप्त p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों को बिना उल्लेखनीय उत्प्रेरकीय सक्रियता में कमी के आठ बार तक पुनःप्रयोग किया जा सका। (चित्र 6)


चित्र 6. p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों की पुनर्चक्रणीयता एवं पुनःप्रयोगशीलता।

p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों द्वारा उत्प्रेरित GBB अभिक्रिया संशोधन से इमिडाज़ो[4,5-c]आइसोक्विनोलिन, इमिडाज़ो[4,5-c][2,7]नैफ्थाइरिडीन तथा इमिडाज़ो[4,5-b]थिएनो[2,3-d]पाइरिडीन से जुड़े स्पाइरोऑक्सिन्डोलों का संश्लेषण किया गया। विभिन्न संरचनात्मक विशेषताओं वाले स्पाइरोऑक्सिन्डोल उत्कृष्ट लब्धि में प्राप्त हुए।

स्पाइरोऑक्सिन्डोल व्युत्पन्नों का संश्लेषण:

स्कीम 3: स्पाइरोऑक्सिन्डोल व्युत्पन्नों का संश्लेषण

 

स्कीम 4: संश्लेषित स्पाइरोऑक्सिन्डोल यौगिक

अभिक्रिया-क्रियाविधि :

प्रथम चरण में p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों की सहायता से ऐल्डिहाइड एवं 2-एमिनोबेंजोथायाज़ोल के बीच इमीन मध्यवर्ती बनता है। इसके बाद आइसोसाइनाइड के साथ नाभिकस्नेहीआक्रमण एवं चक्रीकरण द्वारा GBB उत्पाद प्राप्त होता है। अंतिम चरण में GBB उत्पाद का आइसैटिन के साथ नाभिकस्नेही आक्रमण, प्रोटॉन स्थानांतरण एवं जल निष्कासन होता है। तत्पश्चात वलय-चक्रीकरण एवं विप्रोटोनीकरण द्वारा अंतिम स्पाइरोऑक्सिन्डोल उत्पाद बनता है। (स्कीम 5)

स्कीम 5: प्रस्तावित अभिक्रिया-क्रियाविधि

 

 

 

प्रतिनिधि उत्पाद का अभिलक्षणन:

5-ब्रोमो-6-साइक्लोहेक्सिलअमीनो-3-हाइड्रॉक्सी-2-मेथॉक्सी-6H-स्पाइरो[बेंजो[d]थायाज़ोलो[2,3:2,3]इमिडाज़ो[4,5-c]आइसोक्विनोलिन-5,3-इंडोलिन]-2-वन (1a)

M.p. 192-194oC. IR (KBr) (νmax cm-1): 3365, 2940, 2855, 1665, 1550, 1470, 1390, 1230, 1055, 830, 730.  1H NMR (DMSO-d6) δ (ppm): 1.25-1.90 (m, 10H, CH2), 2.62-2.89 (m, 1H), 3.86 (s, 3H, Me), 6.70-8.15 (m, 9H, ArH), 9.95 (S, 1H, OH), 10.82 (s, 1H, NH). चित्र: (7a)   13C NMR (DMSO-d6) δ (ppm): 25.8, 26.1, 26.8, 56.3, 61.5, 89.4, 110.2, 115.2, 119.3, 121.3, 122.7, 123.6, 124.1, 124.7, 125.6, 129.5, 133.5, 135.7, 136.3, 137.5, 138.5, 140.2, 142.4, 146.1, 147.8, 152.5, 156.5, 170.3. चित्र: (7b)  Anal. calcd. For C30H25BrN4O3S: C 59.90, H 4.19, N 9.31%; found: C 59.84, H 4.11, N 9.24 %.

चित्र: (7a) CDCl में 22°C पर 400 MHz पर रिकॉर्ड किए गए यौगिक 1a का 1H NMR स्पेक्ट्रम (7b) यौगिक 1a का CDCl में 100 MHz पर 13C NMR स्पेक्ट्रम।

निष्कर्ष:

निष्कर्षतः, EtOH माध्यम में p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों को उत्प्रेरक के रूप में उपयोग करते हुए ग्रोक–ब्लैकबर्न–बिएनायमे अभिक्रिया तथा उसके पश्च-संशोधन द्वारा इमिडाज़ो[4,5-c]आइसोक्विनोलिन, इमिडाज़ो[4,5-c][2,7]नैफ्थाइरिडिन तथा इमिडाज़ो[4,5-b]थिएनो[2,3-d]पाइरिडिन से जुड़े स्पाइरोऑक्सिन्डोलों के संश्लेषण की विधि विकसित की गई। यह विधि सरल, पर्यावरण-अनुकूल तथा पुनःप्रयोग योग्य है। p-TSA-संशोधित TiO नैनोकणों ने असंशोधित TiO नैनोकणों की तुलना में बेहतर उत्प्रेरकीय दक्षता प्रदर्शित की। इसका कारण p-TSA के –SO समूहों के बीच सहकारी हाइड्रोजन बंधों द्वारा बनने वाला बहुआणविक नेटवर्क माना गया है। इस विधि की प्रमुख विशेषताएँ हैं— विषाक्तता रहित एवं पुनःप्रयोग योग्य उत्प्रेरक, जल जैसे सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल विलायक का उपयोग तथा अच्छी उत्प्रेरकीय दक्षता। अतः p-TSA-संशोधित TiO नैनोकण हरित उत्प्रेरक के रूप में न केवल शैक्षणिक अनुसंधान बल्कि संभावित औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं।

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