p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकणों
द्वारा उत्प्रेरित
संशोधित ग्रोक-ब्लैकबर्न-बिएनायमे
(GBB) अभिक्रिया के
माध्यम से इमिडाज़ो[4,5-c]आइसोक्विनोलिन,
इमिडाज़ो[4,5-c][2,7]नैफ्थिरीडीन
तथा इमिडाज़ो[4,5-b]थिएनो[2,3-d]पाइरिडीन से
स्पाइरोवलयित
स्पाइरोक्सिंडोलों
का संश्लेषण
अनामिका
प्रजापति1*,
उमेश चेजारा2
1 सहायक
प्रोफेसर, रसायन
विज्ञान
विभाग, सरकारी
विज्ञान
महाविद्यालय, सीकर, राजस्थान, भारत
aonu27@gmail.com
2 व्याख्याता,
भौतिकी
विभाग, प्रधानमंत्री
श्री
एमजीजीएस
जीनी, सूरजगढ़,
झुंझुनू,
राजस्थान,
भारत
सारांश:
मेरे
शोध कार्य में
p-TSA-संशोधित TiO₂ नैनोकणों
द्वारा उत्प्रेरित
एक प्रभावी संश्लेषणात्मक
अभिक्रिया को प्रस्तुत
किया गया है, जिसमें
ग्रोक-ब्लैकबर्न-बिएनायमे
(GBB) अभिक्रिया के
रूपांतरण द्वारा
इमिडाज़ो[4,5-c]आइसोक्विनोलिन,
इमिडाज़ो[4,5-c][2,7]नैफ्थिरीडीन
तथा इमिडाज़ो[4,5-b]थिएनो[2,3-d]पाइरिडीन
से स्पाइरोवलयित
स्पाइरोक्सिंडोलों
का संश्लेषण किया
गया। यह अभिसारी
संश्लेषणात्मक
अभिक्रिया उच्च
बंध-निर्माण दक्षता
के साथ संरचनात्मक
जटिलता एवं आणविक
विविधता को एकल
आणविक ढाँचे में
समाहित करती है।
प्रस्तुत
संश्लेषणात्मक
विधि में 2-एमिनोबेंजोथायाज़ोल,
साइक्लोहेक्सिल/तृतीयक
ब्यूटिल आइसोसाइनाइड
तथा एरोमैटिक/
विषमचक्रीय एरोमैटिक
ऐल्डिहाइडों के
मध्य आइसोसाइनाइड-आधारित
ग्रोक-ब्लैकबर्न-बिएनायमे
अभिक्रिया के पश्चात
EtOH माध्यम में नाभिकिस्नेहि
चक्रीकरण अभिक्रिया
सम्पन्न की गई।
जल को एक अत्यंत
किफायती, सुरक्षित
एवं अहानिकर हरित
विलायक के रूप
में प्रयुक्त किया
गया। p-TSA-संशोधित
TiO₂
नैनोकणों की पुनर्प्राप्ति
एवं पुनः उपयोग
की क्षमता संभावना
इस संश्लेषणात्मक
प्रोटोकॉल को आर्थिक
रूप से व्यवहार्य
बनाती है।
मुख्य
शब्द:
p-TSA-संशोधित TiO₂ नैनोकण;
इमिडाज़ो[4,5-c]आइसोक्विनोलिन;
इमिडाज़ो[4,5-c][2,7]नैफ्थिरीडीन;
इमिडाज़ो[4,5-b]थिएनो[2,3-d]पाइरिडीन;
ग्रोक-ब्लैकबर्न-बिएनायमे
अभिक्रिया (GBB)
प्रस्तावना
वर्तमान
में नैनोकण उत्प्रेरित
पर्यावरण-अनुकूल
आइसोसाइनाइड-आधारित
बहुघटक अभिक्रियाएँ
(Isocyanide-Based Multicomponent Reactions, IMCRs) विविध
एवं जटिल अणुओं
के संश्लेषण के
लिए एक प्रभावशाली
रणनीति के रूप
में उभरी हैं, जिनमें
एक साथ अनेक बंधों
का निर्माण से
एकल आणविक ढाँचे
में औषधीय दृष्टि
से महत्त्वपूर्ण
विषम चक्रीय उपसंरचनाओं
को समाहित करने
वाले संरचनात्मक
रूपांतरण सम्मिलित
होते हैं
चित्र 1.
थायाडायाज़ोल/थायाज़ोल
तथा स्पाइरोऑक्सिन्डोल
अंश युक्त जैवसक्रिय
यौगिक।
हाल
ही में, आइसोसाइनाइड-आधारित
बहुघटक अभिक्रियाओं,
विशेष रूप से ग्रोक-ब्लैकबर्न-बिएनायमे
(Groebke–Blackburn–Bienaymé, GBB) अभिक्रिया
[1-3], ने कार्बनिक
संश्लेषण में विशेष
रुचि आकर्षित की
है। इसका प्रमुख
कारण सरलता से
उपलब्ध ऐल्डिहाइड,
आइसोसाइनाइड तथा
एमिडीन क्रियाकरको
से चिकित्सीय दृष्टि
से महत्त्वपूर्ण
एवं संरचनात्मक
रूप से विविध नाइट्रोजन-युक्त
विषमचक्रीय यौगिकों
के संश्लेषण की
क्षमता है।
शोध
कार्य में पर्यावरण-अनुकूल,
पुनर्प्राप्य
एवं पुनःप्रयोग
योग्य p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकणों
का उत्प्रेरक के
रूप में उपयोग
किया गया। इन नैनोकणों
की सहायता से एथेनॉल
माध्यम में 2-एमिनोबेंजोथायाज़ोल/2-अमीनो-1,3,4-थायाडायाज़ोल,
साइक्लोहेक्सिल/तृतीयक-ब्यूटिल
आइसोसाइनाइड तथा
एरोमैटिक/विषमएरोमैटिक
ऐल्डिहाइडों की
त्रिघटक अभिक्रिया
द्वारा इमिडाज़ोथायाज़ोल
एवं इमिडाज़ोथायाडायाज़ोल
का संश्लेषण किया
गया।
जैविक
रूप से सक्रिय
विषमचक्रीय संरचनाओं
की उपयोगिता तथा
चिकित्सीय दृष्टि
से महत्त्वपूर्ण
विषमचक्रीय यौगिकों
के संश्लेषण पर
हमारे निरंतर अनुसंधान
[4-9] से प्रेरित
होकर, वर्तमान
अध्ययन में ग्रोक-ब्लैकबर्न
अभिक्रिया के उत्पादों
का पश्च-संशोधन
द्वारा किया गया।
इसमें GBB उत्पादों
की आइसैटिन के
साथ p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकणों
द्वारा उत्प्रेरित
अभिक्रिया EtOH माध्यम
में कराई गई, जिससे
औषधीय दृष्टि से
महत्त्वपूर्ण
विषमचक्रीय संरचनाओं
से जुड़े स्पाइरोऑक्सिन्डोल
यौगिकों का संश्लेषण
किया गया। (चित्र
2).
चित्र 2.
औषधीय दृष्टि से
महत्त्वपूर्ण
विषमचक्रीय तंत्रों
के साथ C-3 पर स्पाइरो-समाविष्ट
स्पाइरोऑक्सिन्डोल।.
उत्प्रेरक
का विस्तृत अभिलक्षणन:
FT-IR,
पाउडर X-किरण विवर्तन
(XRD) तथा स्कैनिंग
इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी
(SEM) तकनीकों द्वारा
किया गया। TiO₂ तथा p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकणों
के XRD पैटर्न से दोनों
पदार्थों की संरचनात्मक
विशेषताओं की तुलना
की गई। p-TSA-संशोधित
TiO₂ के XRD विश्लेषण
में विशिष्ट विवर्तन
संकेत प्राप्त
हुए तथा डेबाई–शेरर
समीकरण द्वारा
इसका औसत कण आकार
लगभग 20.88 nm निर्धारित
किया गया।
FT-IR विश्लेषण
में लगभग 3200–3500 cm⁻¹ पर अवशोषण
बैंड अवशोषित जल
की उपस्थिति के
कारण प्राप्त हुए।
1200 cm⁻¹ से कम का व्यापक
बैंड Ti–O–Ti बंध से संबंधित
पाया गया, जबकि
लगभग 555 cm⁻¹
का संकेत Ti–O बंध के
स्ट्रेचिंग कंपन
को दर्शाता है।
p-TSA-संशोधित TiO₂ के स्पेक्ट्रम
में 1137–1224 तथा 1006–1065 cm⁻¹ के संकेत
क्रमशः S=O के असममित
एवं सममित स्ट्रेचिंग
कंपन से संबंधित
हैं। इसके अतिरिक्त,
670–834 cm⁻¹ के क्षेत्र
में S–O स्ट्रेचिंग
संकेत प्राप्त
हुआ। ये संकेत
–SO₃H समूह की उपस्थिति
तथा TiO₂
नैनोकणों के सफल
p-TSA संशोधन की पुष्टि
करते हैं। (चित्र
3,4)
|
|
|
|
चित्र
3. TiO₂
नैनोकणों तथा
p-TSA-संशोधित TiO₂ नैनोकणों
के X-किरण विवर्तन
(XRD) प्रतिरूप। |
चित्र
4. TiO₂
नैनोकणों तथा
p-TSA-संशोधित TiO₂ नैनोकणों
के एफटी-आईआर
(FT-IR) स्पेक्ट्रा। |
SEM विश्लेषण
TiO₂ तथा p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकणों
के SEM चित्र में प्रदर्शित
किए गए हैं। चित्र
6 में दर्शाया गया
1 μm का स्केल सूक्ष्म
आकार के एकत्रित
कणिकाओं (agglomerated granules) के
निर्माण को दर्शाता
है। ये सूक्ष्म
आकार की कणिकाएँ
क्रमशः TiO₂ तथा p-TSA-संशोधित
TiO₂ के नैनो-आकार
के क्रिस्टलाइटों,
जिनका औसत कण आकार
क्रमशः 12.175 nm तथा
20.88 nm है, से निर्मित
पाई गईं। इन कण
आकारों का निर्धारण
डेबाई–शेरर समीकरण
द्वारा किया गया।
( चित्र-5 )
|
|
|
|
चित्र
5. TiO₂
नैनोकणों तथा
p-TSA-संशोधित TiO₂ नैनोकणों
के SEM चित्र। |
|
अभिक्रिया
परिस्थितियों
का अनुकूलन:
GBB
उत्पादों का संश्लेषण
2-एमिनोबेंजोथायाज़ोल/2-अमीनो-1,3,4-थायाडायाज़ोल,
साइक्लोहेक्सिल/तृतीयक-ब्यूटाइल
आइसोसाइनाइड तथा
एरोमैटिक/विषमएरोमैटिक
ऐल्डिहाइडों की
अभिक्रिया द्वारा
किया गया। इस अभिक्रिया
में पुनर्प्राप्य
एवं पुनःप्रयोग
योग्य p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकणों
को उत्प्रेरक के
रूप में तथा EtOH माध्यम
का उपयोग किया
गया।
अभिक्रिया
परिस्थितियों
के अनुकूलन के
लिए प्रारंभ में
2-एमीनो-1,3,4-थायाडायाज़ोल,
साइक्लोहेक्सिल
आइसोसाइनाइड तथा
थायोफीन-2-कार्बैल्डिहाइड
की अभिक्रिया को
मॉडल अभिक्रिया
के रूप में चुना
गया। इसके आधार
पर विभिन्न अभिक्रिया
परिस्थितियों
का अध्ययन कर उपयुक्त
परिस्थितियाँ
निर्धारित की गईं
। (स्कीम 1)
तालिका
1: अभिक्रिया परिस्थितियों
का अनुकूलनᵃ
|
क्र.सं. |
उत्प्रेरक |
विलायकb |
समय
|
|
लब्धि
(%) |
|
|
1. |
p-TSA (15 मोल
%) |
मेथनॉल |
6 घंटे |
|
72 |
|
|
2. |
ट्राइफ्लुओरोएसिटिक
अम्ल (15 मोल %) |
मेथनॉल |
5 घंटे |
|
70 |
|
|
3. |
TiO2 (10
मोल % |
मेथनॉल |
4 घंटे |
|
77
|
|
|
4. |
TiO2 NPs (10 mol %) |
मेथनॉल |
2 घंटे |
|
88 |
|
|
5. |
p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकण (5 मोल
%) |
मेथनॉल |
1 घंटे |
|
92
|
|
|
6. |
p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकण (5 मोल
%) |
जल |
50
मिनट |
|
94 |
|
|
7. |
p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकण (5 मोल
%) |
1,4-डाइऑक्सेन |
3 घंटे |
|
83 |
|
|
8. |
p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकण (5 मोल
%) |
डाइक्लोरोएथेन |
2.5
घंटे |
|
84 |
|
|
9. |
p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकण (5 मोल
%) |
टेट्राहाइड्रोफ्यूरान
(THF) |
3.5
घंटे |
|
84 |
|
|
10. |
p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकण (10 मोल
%) |
EtOH |
35 मिनट |
|
97 |
|
|
11. |
p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकण (15 मोल
%) |
जल |
35
मिनट |
|
97 |
|
बोल्ड
पंक्ति अभिक्रिया
के लिए अनुकूलित
परिस्थितियों
को दर्शाती है।
ᵃ 2-एमिनोबेंजोथायाज़ोल
(1 mmol), साइक्लोहेक्सिल
आइसोसाइनाइड
(1 mmol) तथा थायोफीन-2-कार्बैल्डिहाइड
(1 mmol) को TLC द्वारा अभिक्रिया
पूर्ण होने तक
70°C पर हिलाया गया।
ᵇ विलायक की
मात्रा 2.0 mL थी।
ᶜ शुद्धिकरण
के पश्चात प्राप्त
पृथक लब्धि।
अभिक्रिया
परिस्थितियों
का अनुकूलन एवं
परिणाम:
प्रारंभ
में मॉडल अभिक्रिया
को p-TSA तथा ट्राइफ्लुओरोएसिटिक
अम्ल जैसे अम्लीय
उत्प्रेरकों की
उपस्थिति में मेथनॉल
में कराया गया,
जिसमें मध्यम लब्धि
प्राप्त हुई।
TiO₂ नैनोकणों
ने कम समय में अपेक्षाकृत
बेहतर लब्धि प्रदान
की। इसके बाद p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकणों
का उपयोग करने
पर असंशोधित TiO₂ की तुलना में
अधिक उत्प्रेरकीय
दक्षता तथा बेहतर
लब्धि प्राप्त
हुई।
विभिन्न
विलायकों के अध्ययन
से ज्ञात हुआ कि
p-TSA-संशोधित TiO₂ नैनोकणों
की दक्षता प्रोटिक
विलायकों में अधिक
थी तथा ETOH माध्यम
में सर्वोत्तम
परिणाम प्राप्त
हुआ। उत्प्रेरक
की मात्रा के अनुकूलन
में 10 मोल % p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकणों
से अधिकतम लब्धि
प्राप्त हुई।
GBB अभिक्रिया
द्वारा उत्पाद
प्राप्त करने के
बाद पश्च संशोधन
द्वारा स्पाइरोऑक्सिन्डोलों
की उत्कृष्ट लब्धि
प्राप्त हुई। इसके विपरीत,
वाणिज्यिक TiO₂ तथा असंशोधित
TiO₂ नैनोकणों
से पश्च संशोधन में अंतिम
उत्पाद की बहुत
कम लब्धि प्राप्त
हुई।
स्कीम
2: मॉडल अभिक्रिया
उत्प्रेरक
की पुनर्प्राप्ति
एवं पुनःप्रयोगशीलता
इसके
अतिरिक्त, अनुकूलित
अभिक्रिया परिस्थितियों
में उत्प्रेरक
की पुनर्प्राप्ति
एवं पुनःप्रयोगशीलता
का अध्ययन किया
गया। अभिक्रिया
पूर्ण होने के
बाद उत्प्रेरक
को छनन द्वारा
आसानी से पुनर्प्राप्त
किया गया। इसके
बाद किसी भी अधिशोषित
कार्बनिक यौगिक
को हटाने के लिए
इसे डाइएथिल ईथर
से चार बार धोया
गया तथा पहले निर्वात
में और तत्पश्चात
ओवन में सुखाया
गया। पुनर्प्राप्त
p-TSA-संशोधित TiO₂ नैनोकणों
को बिना उल्लेखनीय
उत्प्रेरकीय सक्रियता
में कमी के आठ बार
तक पुनःप्रयोग
किया जा सका। (चित्र
6)
चित्र
6. p-TSA-संशोधित TiO₂ नैनोकणों
की पुनर्चक्रणीयता
एवं पुनःप्रयोगशीलता।
p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकणों
द्वारा उत्प्रेरित
GBB अभिक्रिया संशोधन
से इमिडाज़ो[4,5-c]आइसोक्विनोलिन,
इमिडाज़ो[4,5-c][2,7]नैफ्थाइरिडीन
तथा इमिडाज़ो[4,5-b]थिएनो[2,3-d]पाइरिडीन
से जुड़े स्पाइरोऑक्सिन्डोलों
का संश्लेषण किया
गया। विभिन्न संरचनात्मक
विशेषताओं वाले
स्पाइरोऑक्सिन्डोल
उत्कृष्ट लब्धि
में प्राप्त हुए।
स्पाइरोऑक्सिन्डोल
व्युत्पन्नों
का संश्लेषण:
स्कीम
3: स्पाइरोऑक्सिन्डोल
व्युत्पन्नों
का संश्लेषण
स्कीम
4: संश्लेषित स्पाइरोऑक्सिन्डोल
यौगिक
अभिक्रिया-क्रियाविधि
:
प्रथम चरण
में p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकणों
की सहायता से ऐल्डिहाइड
एवं 2-एमिनोबेंजोथायाज़ोल
के बीच इमीन मध्यवर्ती
बनता है। इसके
बाद आइसोसाइनाइड
के साथ नाभिकस्नेहीआक्रमण
एवं चक्रीकरण द्वारा
GBB उत्पाद प्राप्त
होता है। अंतिम
चरण में GBB उत्पाद
का आइसैटिन के
साथ नाभिकस्नेही
आक्रमण, प्रोटॉन
स्थानांतरण एवं
जल निष्कासन होता
है। तत्पश्चात
वलय-चक्रीकरण एवं
विप्रोटोनीकरण
द्वारा अंतिम स्पाइरोऑक्सिन्डोल
उत्पाद बनता है।
(स्कीम 5)
स्कीम
5: प्रस्तावित अभिक्रिया-क्रियाविधि
प्रतिनिधि
उत्पाद का अभिलक्षणन:
5′-ब्रोमो-6-साइक्लोहेक्सिलअमीनो-3-हाइड्रॉक्सी-2-मेथॉक्सी-6H-स्पाइरो[बेंजो[d]थायाज़ोलो[2′,3′:2,3]इमिडाज़ो[4,5-c]आइसोक्विनोलिन-5,3′-इंडोलिन]-2′-वन
(1a)
M.p.
192-194oC. IR (KBr) (νmax
cm-1): 3365, 2940, 2855, 1665, 1550, 1470, 1390, 1230, 1055, 830,
730. 1H NMR (DMSO-d6)
δ (ppm): 1.25-1.90 (m, 10H, CH2), 2.62-2.89 (m, 1H), 3.86
(s, 3H, Me),
6.70-8.15 (m, 9H, ArH), 9.95 (S, 1H, OH), 10.82 (s, 1H, NH). चित्र:
(7a) 13C NMR (DMSO-d6)
δ (ppm): 25.8, 26.1, 26.8, 56.3, 61.5, 89.4,
110.2, 115.2, 119.3, 121.3, 122.7, 123.6, 124.1, 124.7, 125.6, 129.5, 133.5,
135.7, 136.3, 137.5, 138.5, 140.2, 142.4, 146.1, 147.8, 152.5, 156.5, 170.3. चित्र:
(7b) Anal. calcd. For C30H25BrN4O3S:
C 59.90, H 4.19, N 9.31%; found: C 59.84, H 4.11, N 9.24 %.
|
|
|
चित्र:
(7a) CDCl₃ में
22°C पर 400 MHz पर रिकॉर्ड
किए गए यौगिक 1a का
1H NMR स्पेक्ट्रम
(7b) यौगिक 1a का
CDCl₃ में
100 MHz पर 13C NMR स्पेक्ट्रम।
निष्कर्ष:
निष्कर्षतः,
EtOH माध्यम में p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकणों
को उत्प्रेरक के
रूप में उपयोग
करते हुए ग्रोक–ब्लैकबर्न–बिएनायमे
अभिक्रिया तथा
उसके पश्च-संशोधन
द्वारा इमिडाज़ो[4,5-c]आइसोक्विनोलिन,
इमिडाज़ो[4,5-c][2,7]नैफ्थाइरिडिन
तथा इमिडाज़ो[4,5-b]थिएनो[2,3-d]पाइरिडिन
से जुड़े स्पाइरोऑक्सिन्डोलों
के संश्लेषण की
विधि विकसित की
गई। यह विधि सरल,
पर्यावरण-अनुकूल
तथा पुनःप्रयोग
योग्य है। p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकणों
ने असंशोधित TiO₂ नैनोकणों
की तुलना में बेहतर
उत्प्रेरकीय दक्षता
प्रदर्शित की।
इसका कारण p-TSA के
–SO₃ समूहों के
बीच सहकारी हाइड्रोजन
बंधों द्वारा बनने
वाला बहुआणविक
नेटवर्क माना गया
है। इस विधि की
प्रमुख विशेषताएँ
हैं— विषाक्तता
रहित एवं पुनःप्रयोग
योग्य उत्प्रेरक,
जल जैसे सुरक्षित
एवं पर्यावरण-अनुकूल
विलायक का उपयोग
तथा अच्छी उत्प्रेरकीय
दक्षता। अतः p-TSA-संशोधित
TiO₂ नैनोकण हरित
उत्प्रेरक के रूप
में न केवल शैक्षणिक
अनुसंधान बल्कि
संभावित औद्योगिक
अनुप्रयोगों के
लिए भी उपयोगी
हो सकते हैं।
संदर्भ:
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रेन,
जे.; यांग,
एम.; लियू,
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एल.; वह, जे.; लेई, चेन. वाई.;
गेंग,
एम.; ज़िओंग,
बी.; शेन, जे.
ग्रोक-ब्लैकबर्न-बायनेमे
प्रतिक्रिया
और उनकी Hsp90
निरोधात्मक
गतिविधि
द्वारा
बहु-प्रतिस्थापित
8-एमिनोइमिडाज़ो
[1,2-ए]
पाइराज़िन।
संगठन.
बायोमोल.
रसायन. 2015,13,
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एसिड: ए ट्रेसलेस,
ग्रीन
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(3)
शाबान,
एस.; अब्देल-वहाब,
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प्रतिक्रिया:
दवा की खोज के
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विद्याचरण,
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उत्प्रेरक-मुक्त
और
विलायक-मुक्त
स्थितियों के
तहत
ग्रोएबके-ब्लैकबर्न-बिएनायमे
प्रतिक्रिया
के माध्यम से 3-अमीनोइमिडाज़ो-फ्यूज्ड
हेटरोसायकल
के संश्लेषण
के लिए एक
आसान
प्रोटोकॉल।
हरा रसायन. 2014,
16, 1168-1175.
(4)
राजावत,
ए.; खंडेलवाल,
एस.; कुमार,
एम. डीप
यूटेक्टिक
सॉल्वेंट ने
स्पाइरॉक्सिंडोल्स
के संश्लेषण
के लिए कुशल
और पर्यावरण की
दृष्टि से
सौम्य चार-घटक
डोमिनो
प्रोटोकॉल को
बढ़ावा दिया।
आरएससी
सलाहकार, 2014, 4,
5105-5112।
(5)
आर्य,
ए.के.; कुमार,
एम.
फ़्यूज्ड
हेटरोसिस्टम्स
के साथ
संरचनात्मक
रूप से विविध
स्पाइरोहेटेरोसायकल
के संश्लेषण
के लिए एक
कुशल हरित
रासायनिक
दृष्टिकोण।
ग्रीन केम.,
2011, 13,1332-1338.
(6)
गुप्ता,
एस. के.;
आर्य,
ए.के.; खंडेलवाल,
एस.; कुमार,
एम.
क्रोमेनो-,
पायरानो-
और
क्विनोलिनोफ्यूज्ड
स्पाइरो[पाइराज़ोलो[3,4-बी]पाइरीडीन-इंडोलिन]
के संश्लेषण
के लिए एक तंडेम
और डोमिनो
प्रोटोकॉल। Current
Organic Chemistry, 2014, 18, 2555-2560.
(7)
खंडेलवाल,
एस.
राजावत, ए.; टेलर,
वाई. के.;
कुमार,
एम. कोलीन
क्लोराइड-ऑक्सालिक
एसिड
यूटेक्टिक
मिक्सचर को
कैटलिस्ट/सॉल्वेंट
सिस्टम के तौर
पर इस्तेमाल
करके
स्पाइरॉक्सिंडोल्स
के सिंथेसिस
के लिए एक
आसान, असरदार और
पर्यावरण के
लिए अच्छा
सिंथेटिक प्रोटोकॉल।
कंघा। रसायन।
और हाई
थ्रूपुट
स्क्रीन.,
2014, 17, 763-769.
(8)
टेलर,
वाई.के.;
खंडेलवाल,
एस.; कुमारी,
वाई.; अवस्थी,
के.; कुमार,
एम. TiO2
नैनोपार्टिकल्स
को एक
हेटेरोजीनियस
कैटेलिस्ट के
रूप में
इस्तेमाल
करके
स्पाइरोहेट्रोसाइकल्स
का एक कुशल एक
पॉट
तीन-कंपोनेंट
नैनोकैटलाइज्ड
सिंथेसिस। RSC
Adv., 2015, 5, 46415-46422.
(9)
टेलर,
वाई.के.;
खंडेलवाल,
एस.; जैन, एच. के.;
कुमार,
एम. टिकाऊ
और
पुनर्चक्रण
योग्य कोलाइन
क्लोराइड
आधारित डीप
यूटेक्टिक
मिश्रण का
उपयोग करके
स्पिरोक्विनाज़ोलिनोन
के संश्लेषण
के लिए
पर्यावरण के
अनुकूल
सिंथेटिक
प्रोटोकॉल।
वर्तमान
ऑर्गेनिक
संश्लेषण,
2015, 12, 484-491.