भोजन संबंधी भ्रांतियाँ एवं प्रतिरोधक क्षमता पर उनका प्रभाव: झांसी जनपद (बुंदेलखंड) की टहरौली एवं गरौठा तहसील की ग्रामीण महिलाओं का अध्ययन
विजया दुबे1*, डॉ. प्रतिभा पाल2
1 शोधार्थी, गृह विज्ञान विभाग, पी.के. विश्वविद्यालय, थानरा, मध्य प्रदेश, भारत
Brajeshtiwari30894@gmail.com
2 सहेयक प्रोफेसर, गृह विज्ञान विभाग, पी.के. विश्वविद्यालय, थानरा, मध्य प्रदेश, भारत
सारांश: प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य झांसी जनपद की टहरौली एवं गरौठा तहसीलों की ग्रामीण महिलाओं में प्रचलित भोजन संबंधी भ्रांतियों तथा प्रतिरोधक क्षमता पर उनके संभावित प्रभाव का अध्ययन करना है। साथ ही, महिलाओं की सामाजिक-जनांकिकीय विशेषताओं तथा पोषण संबंधी जागरूकता एवं खान-पान की मान्यताओं के बीच संबंध को समझने का प्रयास किया गया है। अध्ययन के लिए प्रश्नावली के माध्यम से प्राथमिक आंकड़े एकत्र किए गए तथा संबंधित पुस्तकों, सरकारी प्रतिवेदनों और अन्य उपलब्ध स्रोतों का भी उपयोग किया गया। अध्ययन में 400 महिला उत्तरदाताओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। परिणामों में महिलाओं की आयु, परिवार के आकार, शैक्षिक योग्यता, जाति तथा विवाह के समय आयु में विविधता पाई गई। अध्ययन से संकेत मिलता है कि सामाजिक एवं शैक्षिक परिस्थितियाँ ग्रामीण महिलाओं की पोषण संबंधी जागरूकता और खान-पान की मान्यताओं को समझने में महत्वपूर्ण हैं। अतः भोजन संबंधी भ्रांतियों को दूर करने, पोषण शिक्षा को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रभावी पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी हस्तक्षेप विकसित करने की आवश्यकता है।
मुख्य शब्द: भोजन संबंधी भ्रांतियाँ, ग्रामीण महिलाएँ, पोषण, प्रतिरोधक क्षमता, पोषण जागरूकता, खान-पान की मान्यताएँ, झांसी, बुंदेलखंड।
1. प्रस्तावना
पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण को लेकर व्यापक जागरूकता देखने को मिली है। ग्रामीण क्षेत्रों में भारत की लगभग दो-तिहाई आबादी निवास करती है, जबकि यहां स्वास्थ्य, पोषण एवं आधारभूत चिकित्सा सुविधाएं, अस्पताल तथा अन्य संसाधन मात्र एक-तिहाई ही उपलब्ध हैं। यह स्थिति स्पष्ट रूप से असंतुलन की ओर संकेत करती है।
कुछ ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं भी हैं जो ग्रामीण महिलाओं में अधिक सघन रूप से पाई जाती हैं। इनमें अस्वच्छ पेयजल का उपयोग, अस्वास्थ्यकर जीवन-स्थितियां तथा जागरूकता का अभाव प्रमुख हैं। संक्रामक रोग ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत तेजी से फैलते हैं। आजकल की बदलती जीवनशैली के कारण ग्रामीण महिलाओं में भी शहरी क्षेत्रों के समान प्राणघातक बीमारियां, जैसे—मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थायरॉयड एवं मोटापा—तेजी से फैल रही हैं।
ग्रामीण महिलाओं के एक बड़े अनुपात में संतुलित आहार की अवधारणा, विभिन्न खाद्य समूहों और उनकी अपनी विशिष्ट पोषण संबंधी आवश्यकताओं के बारे में पर्याप्त जागरूकता की कमी है। जागरूकता में यह अंतर भोजन से संबंधित प्रचलित मिथकों और वर्जनाओं से और बढ़ जाता है, विशेष रूप से गर्भावस्था, स्तनपान, मासिक धर्म और बीमारी से संबंधित, जो पौष्टिक खाद्य पदार्थों के सेवन को हतोत्साहित करते हैं। ग्रामीण महिलाओं की अच्छी तरह से मान्यता प्राप्त पोषण भेद्यता के बावजूद, झांसी जिले की ग्रामीण महिलाओं के बीच आहार-प्रतिरक्षा संबंध पर बहुत कम क्षेत्र-विशिष्ट अनुभवजन्य अनुसंधान किया गया है। इस अंतर के लिए एक केंद्रित अध्ययन की आवश्यकता है जो वैज्ञानिक रूप से यह स्थापित कर सकता है कि आहार का सेवन इस क्षेत्र की ग्रामीण महिलाओं की प्रतिरक्षा स्थिति को कैसे प्रभावित करता है, और इस तरह उपयुक्त पोषण संबंधी हस्तक्षेपों के लिए एक आधार प्रदान करता है।
ग्रामीण महिलाएं एक कमजोर समूह का गठन करती हैं क्योंकि वे घर के भीतर और कृषि क्षेत्रों दोनों में कठिन शारीरिक कार्य करती हैं, फिर भी अक्सर परिवार के भोजन का सबसे छोटा और कम से कम पौष्टिक हिस्सा खाने और प्राप्त करने के लिए अंतिम होती हैं। खराब साक्षरता, जल्दी विवाह, बार-बार बच्चे पैदा करना और स्वास्थ्य सेवा तक सीमित पहुंच कुपोषण के प्रति उनकी संवेदनशीलता को और बढ़ाती है और प्रतिरक्षा को कमजोर करती है।
बुंदेलखंड भारत के सबसे पोषण और आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में से एक है, फिर भी इसे अपनी ग्रामीण महिलाओं के बीच आहार-प्रतिरक्षा संबंध के व्यवस्थित मूल्यांकन के संबंध में बहुत सीमित विद्वानों का ध्यान मिला है। बुंदेलखंड की पोषण स्थिति पर शोध में यह क्षेत्रीय अंतर वर्तमान अध्ययन को समय पर और आवश्यक दोनों बनाता है। अध्ययन के निष्कर्षों से क्षेत्र-विशिष्ट साक्ष्य उत्पन्न करके प्रत्यक्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व होने की उम्मीद है जो पोषण शिक्षा कार्यक्रमों, सरकारी कल्याण योजनाओं और सामुदायिक स्तर के हस्तक्षेपों को सूचित कर सकते हैं जिनका उद्देश्य झांसी जिले और व्यापक बुंदेलखंड क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं की आहार प्रथाओं और प्रतिरक्षा स्थिति में सुधार करना है।
2. उद्देश्य
- टहरौली एवं गरौठा तहसील की ग्रामीण महिलाओं में प्रचलित भोजन संबंधी भ्रांतियों की पहचान करना तथा प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ने वाले उनके प्रभाव का अध्ययन करना।
- उत्तरदाताओं की सामाजिक-जनांकिकीय विशेषताओं (आयु, परिवार का आकार, शैक्षिक योग्यता, जाति एवं विवाह के समय आयु) का पोषण संबंधी जागरूकता एवं खान-पान की मान्यताओं के संदर्भ में अध्ययन करना।
- महिलाओं के पोषण एवं जागरूकता में सुधार से संबंधित सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य नीति की रूपरेखा (प्रबंधन कार्य, अवधारणात्मक मॉडल एवं नीति निर्माण) की समीक्षा करना।
3. अनुसंधान पद्धति
3.1 आंकड़ों का संकलन
प्रस्तुत शोध कार्य को संपादित करने के लिए बुंदेलखंड क्षेत्र की झांसी जिले में ग्रामीण महिलाओं की आहार एवं प्रतिरोधक क्षमता का अध्ययन किया गया है अध्ययन क्षेत्र महिला के पोषण स्तर तथा असंतुलित भोजन से होने वाली बीमारियों तथा प्रतिरोधक क्षमता का व्यापक अध्ययन किया गया है
उपरोक्त सैद्धांतिक पक्षो के सत्यापन हेतु प्रस्तुत शोधकर्ता को संपादित करने के लिए आंकडो और तथ्यों का संकलन किया गया है पोषण स्तर से संबंधित आंकड़ों का संकलन प्रश्नावली विधि से किया गया है अध्ययन क्षेत्र के सामाजिक स्वरूप को ध्यान में रखकर प्रश्नावली का निर्माण किया गया है अध्ययन की सार्थकता को पूरा करने के लिये उपलब्ध आंकड़ों का सहारा भी लिया गया है अध्ययन से सम्बंधित तथ्यों को संकलित करने हेतु पुस्तकालयो, पुस्तकों सरकारी प्रतिवेदनों एवं विभिन्न आयोग की अनुशंसाओं का भी समावेश किया गया है!-
3.2 अध्ययन उपकरण
किसी भी शोध अध्ययन की सफलता शोध कार्य मे प्रयुक्त किए गए उपकरणों की कोटि पर निर्भर करती है अतः यह आवश्यक होता है कि शोधार्थियों शोध समस्या के अनुरूप ही मानकीकृत एवं प्रमाणीकृत उपकरणों का चयन करें जो अनुसंधान के उद्देश्य के अनुरूप हो!
3.3 अध्ययन क्षेत्र
झाँसी भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में स्थिति एक जिला है यह उत्तर प्रदेश एंव मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित है यह 5024 वर्ग किमी. में फैला हुआ है जिसमे 5 तहसीले आती है!
2011 की जनगणना के अनुसार झाँसी जिले की कुल जनसंख्या लगभग 1998603 थी जिसमें लिंगानुपात 1000 पुरुषो पर लगभग 890 महिलाये थी चूकि अभी नवीन जनगणना के आंकड़े उपलब्ध नही है किन्तु अनुमानो के अनुसार जनगणना में अत्यन्त वृद्धि हुयी है 2011 के जनगणना के अनुसार झाँसी जिले में परिवारो की सं. 367779 तथा साक्षरता दर 83% थी इनमें अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्र में निवास करती है जहाँ पर महिलाओं की पोषण स्थिति तथा उनकी प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने पर ध्यान नही दिया जाता है अतः शोधार्थि ने झाँसी जनपद की ग्रामीण महिलाओ में आहार एंव प्रतिरोधक क्षमता का विस्तृत अध्ययन किया है तथा उनके Data के संकलन को तहसील के क्रम अनुसार संकलित किया जा सके!
टहरौली तहसील
टहरौली तहसील का क्षेत्रफल लगभग 881.36 वर्ग किलोमीटर है।
कुल गाँव – 152। इनमें से शोधार्थी ने अध्ययन हेतु निम्नलिखित गाँवों का चयन किया है— लोहर गाँव, बहोरा, टहरौली खास, बरुआ तथा वकूवा।
कुल आबादी – 1,77,754।
2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ का शिक्षा स्तर माध्यमिक से उच्च शिक्षा तक निरंतर विकसित हो रहा है।
लिंगानुपात – प्रति 1000 पुरुषों पर लगभग 900 महिलाएँ हैं।
गरौठा तहसील
कुल गाँव – 156। इनमें से शोधार्थी ने अध्ययन हेतु निम्नलिखित पाँच गाँवों का चयन किया है— अमरपुर, अम्बाबाय, आरी, अठौंदना तथा बिजोली।
कुल आबादी – 1,06,663।
2011 की जनगणना के अनुसार, यहाँ का शिक्षा स्तर धीरे-धीरे सुधार की ओर अग्रसर है, किन्तु यह अभी भी मुख्य शहरी केंद्रों की तुलना में माध्यमिक स्तर का माना जाता है। सरकारी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के माध्यम से साक्षरता दर में वृद्धि हो रही है। उच्च शिक्षा के लिए छात्र मुख्य रूप से झाँसी शहर पर निर्भर रहते हैं।
लिंगानुपात – प्रति 1000 पुरुषों पर लगभग 870–871 महिलाएँ हैं।
3.4 अध्ययन का दायरा
वर्तमान अध्ययन भौगोलिक रूप से उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित झांसी जिले के चुनिंदा ग्रामीण क्षेत्रों और गांवों तक ही सीमित है। अध्ययन विशेष रूप से 18 से 45 वर्ष के आयु वर्ग की वयस्क ग्रामीण महिलाओं पर केंद्रित है जो अध्ययन क्षेत्र में चयनित गांवों की स्थायी निवासी हैं। शोध का दायरा मुख्य रूप से ग्रामीण महिलाओं की प्रतिरक्षा स्थिति के साथ-साथ आहार और भोजन के सेवन के पैटर्न के मूल्यांकन तक सीमित है, जिससे स्वास्थ्य के अन्य व्यापक पहलुओं जैसे प्रजनन स्वास्थ्य स्थितियों, नैदानिक रोग प्रोफाइलिंग और पुरानी बीमारी के पैटर्न को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इस अध्ययन को यह समझने के लिए तैयार किया गया है कि कैसे आहार की आदतें चयनित क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं में प्रतिरक्षा को प्रभावित करती हैं। इसके अलावा, अध्ययन की अवधि, जिसमें क्षेत्र सर्वेक्षण, डेटा संग्रह और डेटा विश्लेषण शामिल हैं, एक शैक्षणिक वर्ष की अवधि में किया गया था, जो परिभाषित अनुसंधान ढांचे के भीतर डेटा का व्यवस्थित संग्रह और व्याख्या सुनिश्चित करता है।
4. डेटा विश्लेषण और परिणाम
इस अनुभाग में झांसी जनपद की टहरौली एवं गरौठा तहसीलों की ग्रामीण महिलाओं में प्रचलित भोजन संबंधी भ्रांतियों, पोषण संबंधी जागरूकता तथा उनके सामाजिक-जनांकिकीय स्वरूप से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। अध्ययन में कुल 400 महिला उत्तरदाताओं से प्राप्त प्राथमिक आंकड़ों का उपयोग किया गया। विश्लेषण में आयु, परिवार के आकार, शैक्षिक योग्यता, जाति तथा विवाह के समय आयु जैसे प्रमुख सामाजिक-जनांकिकीय चर शामिल किए गए हैं। इन कारकों के आधार पर ग्रामीण महिलाओं की पोषण संबंधी जागरूकता और खान-पान से जुड़ी मान्यताओं को समझने का प्रयास किया गया है। परिणामों का प्रस्तुतीकरण तालिकाओं और ग्राफों के माध्यम से किया गया है, ताकि अध्ययन के प्रमुख निष्कर्षों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया जा सके।
सार्वजनिक स्वास्थ्य की तीन मुख्य भूमिकाएँ हैंः 1) मूल्यांकन; 2) नीति प्रबंधन और 3) आश्वासन। इसे देखते हुए, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति करते हैं (नीचे दी गई तालिका देखें) शोध के अनुसार, सार्वजनिक स्वास्थ्य के पेशे में तीन क्षेत्र शामिल हैंः स्वास्थ्य सुरक्षा, स्वास्थ्य में सुधार और स्वास्थ्य सेवा में सुधार।
तालिका 1: सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल नीति प्रबंधन कार्य
क्रम संख्या | मुख्य कार्य | प्रमुख गतिविधियाँ |
1 | आकलन | • आबादी में बीमारी और चोट लगने की घटनाओं पर नज़र रखना |
2 | नीति विकास | • स्वास्थ्य से जुड़े ट्रेंड्स को ट्रैक करना और बीमारियों के कारणों का विश्लेषण करना |
3 | आश्वासन | • समुदाय की स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतों और आवश्यकताओं की पहचान करना |
चित्र 1: सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए अवधारणात्मक मॉडल
सुविधाएं और कर्मचारी स्वास्थ्य वितरण प्रणाली के मापदंड बनाते हैं। अन्य मापदंडों में संख्या, मात्रा, आकार, वितरण, स्थान, संगठन, प्राथमिकताएं, पूर्वाग्रह, मूल्य और गुणवत्ता शामिल हैं। दूसरा घटक संभावित उपभोक्ताओं (व्यक्तियों और समुदायों) की विशेषताओं से बना है जिसमें संख्या, वितरण, स्थान, प्रभावी मांग, सेवा की आवश्यकता, सेवा प्राप्त करने की क्षमता, प्राथमिकताएं, पूर्वाग्रह, दृष्टिकोण और मूल्य शामिल हैं।
चित्र 2: स्वास्थ्य संबंधी नीति निर्माण
सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र के माध्यम से गुणवत्ता-केंद्रित निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, उपशामक और पुनर्वास सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना और सभी क्षेत्रों में समन्वित नीतिगत कार्रवाई के माध्यम से स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार करना (अल-कुदा एट अल।, 2023)
तालिका 2: उत्तरदाताओं की आयु के आधार पर वर्गीकरण
क्रं• सं | उत्तरदाताओं की आयु का विवरण | उत्तरदाताओं की संख्या | प्रतिशत |
1 | 15 से 25 वर्ष | 55 | 13.7% |
2 | 26 से 35 वर्ष | 95 | 23.7% |
3 | 36 से 45 वर्ष | 135 | 33.7% |
4 | 46 से 55 वर्ष | 90 | 22.5% |
5 | 56 से अधिक | 25 | 6.25% |
योग | 400 | 100 |
उपरोक्त तालिका 2 के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि उत्तरदाताओं का आयु वर्ग के आधार पर अध्ययन करने पर 13.7% उत्तरदाता 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित हैं। 23.7% उत्तरदाता 26 से 35 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित हैं। 33.7% उत्तरदाता 36 से 45 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित हैं। 22.5% उत्तरदाता 46 से 55 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित हैं तथा 6.25% उत्तरदाता 56 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से संबंधित हैं।
ग्राफ 3: उत्तरदाताओं की आयु के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 3: उत्तरदाताओ का परिवार के आकार के आधार पर वर्गीकरण
क्रं• सं | उत्तरदाताओ के परिवार के आकार का विवरण | उत्तरदाताओ की संख्या | प्रतिशत |
1 | छोटा आकार (2 से 4 सदस्य) | 205 | 51.2% |
2 | मध्यम आकार (5 से 7 सदस्य) | 195 | 48.7% |
3 | बडा आकार (7 से अधिक) | 100 | 25% |
योग- | 400 | 100 |
उपरोक्त तालिका 4.27 के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि उत्तरदाताओं के परिवार के आकार के आधार पर अध्ययन करने पर 51.2% उत्तरदाताओं के परिवार का आकार छोटा है, 48.7% उत्तरदाताओं के परिवार का आकार मध्यम है तथा 25% उत्तरदाताओं के परिवार का आकार बड़ा है।
ग्राफ 4: उत्तरदाताओ का परिवार के आकार के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 4: उत्तरदाताओं की आयु के आधार पर वर्गीकरण
क्रं• सं | उत्तरदाताओ की आयु का विवरण | उत्तरदाताओं की संख्या | प्रतिशत |
1 | प्राथमिक स्तर | 60 | 15% |
2 | माध्यमिक स्तर तक | 200 | 50% |
3 | स्नातक/ स्नातकोत्तर स्तर तक | 138 | 34.5% |
4 | उच्च स्तर | 02 | 0.5% |
| योग | 400 | 100 |
उपरोक्त तालिका के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि उत्तरदाताओं की शैक्षिक योग्यता के आधार पर अध्ययन करने पर 15% उत्तरदाताओं की शैक्षिक पृष्ठभूमि माध्यमिक स्तर की पाई गई है, 50% उत्तरदाताओं की शैक्षिक पृष्ठभूमि स्नातक स्तर की पाई गई है तथा 34.5% उत्तरदाताओं की शैक्षिक पृष्ठभूमि स्नातकोत्तर अथवा उच्च शिक्षा स्तर की पाई गई है। शिक्षा का स्तर पोषण संबंधी जागरूकता के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
ग्राफ 5: उत्तरदाताओं की आयु के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 5: उत्तरदाताओ का जाति के आधार पर वर्गीकरण
क्र. स. | उत्तर दाताओ की जाति | उत्तरदाताओ की संख्या | प्रतिशत |
1 | सामान्य जाति | 55 | 13.75% |
2 | पिछडी जाति | 200 | 50% |
3 | अनुसूचित जाति | 150 | 37.5% |
4 | अन्य | 00 | 00 |
योग- | 400 | 100 |
उपरोक्त तालिका 5 के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि महिला उत्तरदाताओं का जाति के आधार पर अध्ययन करने पर 13.75% महिला उत्तरदाता सामान्य वर्ग से संबंधित हैं, 50% महिला उत्तरदाता अन्य पिछड़ी जाति से संबंधित हैं, 37.5% महिला उत्तरदाता अनुसूचित जाति से संबंधित हैं तथा 0% महिला उत्तरदाता अन्य जाति से संबंधित हैं।
ग्राफ 6: उत्तरदाताओ का जाति के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 6: उत्तरदाताओं का विवाह के समय आयु के आधार पर वर्गीकरण
क्रं•सं• | उत्तरदाताओं के विवाह के समय आयु का विवरण | | प्रतिशत |
1 | 15 से 20 वर्ष | 198 | 49.5% |
2 | 21 से 25 वर्ष | 82 | 20.5% |
3 | 26 से 30 वर्ष | 70 | 17.5% |
4 | 31 से 35 वर्ष | 25 | 8.75% |
5 | 35 वर्ष से अधिक | 05 | 1.25% |
योग- | 400 | 100 |
तालिका 6 के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि महिला उत्तरदाताओं का विवाह के समय आयु के आधार पर अध्ययन करने पर 49.5% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 15 से 20 वर्ष थी। 20.5% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 21 से 25 वर्ष थी। 17.5% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 26 से 30 वर्ष थी। 8.75% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 31 से 35 वर्ष थी, जबकि 1.25% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 35 वर्ष से अधिक थी।
ग्राफ 7: उत्तरदाताओं का विवाह के समय आयु के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 8: उत्तरदाताओं की आयु का विवरण
क्रं• सं | उत्तरदाताओं की आयु का विवरण | उत्तरदाताओं की संख्या | प्रतिशत |
1 | 15 से 25 वर्ष | 40 | 10% |
2 | 26 से 35 वर्ष | 100 | 25% |
3 | 36 से 45 वर्ष | 120 | 30% |
4 | 46 से 55 वर्ष | 120 | 30% |
5 | 56 से अधिक | 20 | 5% |
योग- | 400 | 100 |
उपरोक्त तालिका 8 के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि उत्तरदाताओं का आयु वर्ग के आधार पर अध्ययन करने पर 10% उत्तरदाता 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित हैं। 25% उत्तरदाता 26 से 35 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित हैं। 30% उत्तरदाता 36 से 45 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित हैं। 30% उत्तरदाता 46 से 55 वर्ष आयु वर्ग से संबंधित हैं, तथा 5% उत्तरदाता 56 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से संबंधित हैं।
ग्राफ 8: उत्तरदाताओं की आयु का विवरण
तालिका 9: उत्तरदाताओ का परिवार के आकार के आधार पर वर्गीकरण
क्रं• सं | उत्तरदाताओ के परिवार के आकार का विवरण | उत्तरदाताओ की संख्या | प्रतिशत |
1 | छोटा आकार (2 से 4 सदस्य) | 140 | 35% |
2 | मध्यम आकार (5 से 7 सदस्य) | 180 | 45% |
3 | बडा आकार (7 से अधिक) | 80 | 20% |
योग- | 400 | 100 |
उपरोक्त तालिका 9 के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि उत्तरदाताओं के परिवार के आकार के आधार पर अध्ययन करने पर 35% उत्तरदाताओं के परिवार का आकार छोटा है, 45% उत्तरदाताओं के परिवार का आकार मध्यम है तथा 20% उत्तरदाताओं के परिवार का आकार बड़ा है।
ग्राफ 9: उत्तरदाताओ का परिवार के आकार के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 10: उत्तरदाताओं की शैक्षिक योग्यता के आधार पर वर्गीकरण
क्रं• सं | उत्तरदाताओ की आयु का विवरण | उत्तरदाताओं की संख्या | प्रतिशत |
1 | प्राथमिक स्तर | 65 | 16.25% |
2 | माध्यमिक स्तर तक | 165 | 41.25% |
3 | स्नातक/ स्नातकोत्तर स्तर तक | 140 | 35% |
4 | उच्च स्तर | 30 | 7.5% |
योग- | 400 | 100 |
उपरोक्त तालिका के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि उत्तरदाताओं की शैक्षिक योग्यता के आधार पर अध्ययन करने पर 16.25% उत्तरदाताओं की शैक्षिक पृष्ठभूमि माध्यमिक स्तर की पाई गई है, 41.25% उत्तरदाताओं की शैक्षिक पृष्ठभूमि स्नातक स्तर की पाई गई है तथा 35% उत्तरदाताओं की शैक्षिक पृष्ठभूमि स्नातकोत्तर अथवा उच्च शिक्षा स्तर की पाई गई है। शिक्षा का स्तर पोषण संबंधी जागरूकता के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
ग्राफ 10: उत्तरदाताओं की शैक्षिक योग्यता के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 11: उत्तरदाताओ का जाति के आधार पर वर्गीकरण
क्र. स. | उत्तर दाताओ की जाति | उत्तरदाताओ की संख्या | प्रतिशत |
1 | सामान्य जाति | 145 | 36.25% |
2 | पिछडी जाति | 85 | 21.25% |
3 | अनुसूचित जाति | 160 | 40% |
4 | अन्य | 10 | 2.5% |
योग- | 400 | 100 |
उपरोक्त तालिका 11 के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि महिला उत्तरदाताओं का जाति के आधार पर अध्ययन करने पर 36.25% महिला उत्तरदाता सामान्य वर्ग से संबंधित हैं, 21.25% महिला उत्तरदाता अन्य पिछड़ी जाति से संबंधित हैं, 40% महिला उत्तरदाता अनुसूचित जाति से संबंधित हैं तथा 2.5% महिला उत्तरदाता अन्य जाति से संबंधित हैं।
ग्राफ 11: उत्तरदाताओ का जाति के आधार पर वर्गीकरण
तालिका 12: उत्तरदाताओं का विवाह के समय आयु के आधार पर वर्गीकरण
क्रं•सं• | उत्तरदाताओं के विवाह के समय आयु का विवरण | उत्तरदाताओ की संख्या | प्रतिशत |
1 | 15 से 20 वर्ष | 175 | 43.75% |
2 | 21 से 25 वर्ष | 125 | 31.25% |
3 | 26 से 30 वर्ष | 200 | 25% |
4 | 31 से 35 वर्ष | 00 | 00% |
5 | 35 वर्ष से अधिक | 00 | 00% |
योग- | 400 | 100 |
तालिका 12 के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि महिला उत्तरदाताओं का विवाह के समय आयु के आधार पर अध्ययन करने पर 43.75% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 15 से 20 वर्ष थी। 31.25% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 21 से 25 वर्ष थी। 25% महिला उत्तरदाताओं की विवाह के समय आयु 26 से 30 वर्ष थी, जबकि 31 से 35 वर्ष तथा 35 वर्ष से अधिक आयु में विवाह करने वाली महिला उत्तरदाताओं का प्रतिशत 0% पाया गया।
ग्राफ 12: उत्तरदाताओं का विवाह के समय आयु के आधार पर वर्गीकरण
5. निष्कर्ष
प्रस्तुत अध्ययन से स्पष्ट होता है कि ग्रामीण महिलाओं के पोषण, खान-पान की मान्यताओं तथा स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को सामाजिक एवं जनांकिकीय परिस्थितियों के संदर्भ में समझना आवश्यक है। अध्ययन में 400 महिला उत्तरदाताओं को शामिल किया गया तथा उनकी आयु, परिवार के आकार, शैक्षिक योग्यता, जाति और विवाह के समय आयु का विश्लेषण किया गया। परिणामों में विभिन्न आयु वर्गों, परिवार संरचनाओं तथा सामाजिक समूहों का प्रतिनिधित्व पाया गया। अध्ययन में शिक्षा को पोषण संबंधी जागरूकता से जुड़ा महत्वपूर्ण कारक माना गया है।
अध्ययन के आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि बड़ी संख्या में महिलाओं का विवाह अपेक्षाकृत कम आयु में हुआ था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एक प्रमुख नमूने में 49.5% महिलाओं का विवाह 15–20 वर्ष की आयु में हुआ था। ग्रामीण महिलाओं में भोजन संबंधी भ्रांतियों और पोषण संबंधी जागरूकता में सुधार के लिए पोषण शिक्षा, स्थानीय स्तर पर जागरूकता तथा उपयुक्त सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को बढ़ावा देना आवश्यक है। इस प्रकार, क्षेत्र-विशिष्ट पोषण संबंधी हस्तक्षेप ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य एवं प्रतिरोधक क्षमता में सुधार के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
संदर्भ
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