वैदिकसाहित्यस्य आधुनिक शैक्षिक व्यवस्थायां योगदानम्: एक समीक्षात्मक अध्ययनम्

Authors

  • संध्या मिश्रा रिसर्च स्कॉलर, सनराइज़ यूनिवर्सिटी, अलवर, राजस्थान Author
  • डॉ. रेणु सिंह एसोसिएट प्रोफेसर, संस्कृत विभाग, सनराइज़ यूनिवर्सिटी, अलवर, राजस्थान Author

DOI:

https://doi.org/10.29070/c7hsex40

Keywords:

वैदिकसाहित्य, पाठ्यक्रमसमावेशः, राष्ट्रियशिक्षानीतिः, संस्कृतशिक्षा, CBSE-NCERT

Abstract

अस्मिन् शोधे वैदिकसाहित्यस्य वर्तमानप्रयोजनम् तथा पाठ्यक्रमेषु तस्य समावेशनस्य स्थिति विशदीकृता अस्ति। वैदिकसाहित्यं केवलं प्राचीनधार्मिकपाठ्यवस्तु नास्ति, अपितु तस्य सामाजिकं, नैतिकं, शैक्षिकं च महत्वं आधुनिकयुगे अपि दृश्यते। यथार्थतया, केन्द्रीयमाध्यमिकशिक्षापरिषद् (CBSE) तथा राष्ट्रियशैक्षिकअनुसन्धानपरिषद् (NCERT) इत्यादयः संस्थाः संस्कृतं च योगं च वैकल्पिकविषयरूपेण प्रस्तुतवन्तः। तद्वत् राष्ट्रियशिक्षानीतिः 2020 इत्यस्मिन् भारतीयपरम्परायाः पुनर्स्वीकारः स्पष्टतया दृश्यते। कतिपये विश्वविद्यालयेषु वैदिकविषयानाम् अध्ययनाय विशेषसंस्थानानि अपि आरब्धानि सन्ति।

शोधकार्ये माध्यमरूपेण द्वयम् उपयुज्यते – प्रत्यक्षतः पाठ्यक्रमसमीक्षा (curriculum analysis) तथा द्वितीयतः अनुसन्धानात्मकवाङ्मयानां (secondary data) सम्यक् विश्लेषणम्। शोधस्य मुख्यविषयाः अष्ट च – पाठ्यक्रमेषु वैदिकसाहित्यस्य वर्तमानस्थिति, शिक्षानीतिसम्बन्धिनी नीतिक्रमाः, विश्वविद्यालयीयस्तरस्य समीक्षणम्, चतुर्थं च शिक्षायाः संस्कृतिकं दायित्वम् इत्यादयः।

विश्लेषणस्य फलरूपेण ज्ञातं यत् यद्यपि संस्कृतभाषा च योगः च पाठ्यक्रमेषु सन्निविष्टौ स्तः, तथापि वैदिकवाङ्मयस्य सम्यक् समावेशः एकात्मतया न दृश्यते। अनेकेषां शिक्षाविदां अभिप्रायानुसारं, वैदिकविषयं केवलं धार्मिकपाठ्यवस्तुरूपेण न स्वीकरणीयं, अपि तु तस्य विवेचनात्मकपाठ्यवस्तुरूपेण प्रस्तुति आवश्यकाऽस्ति।

अतः, समुचितशैक्षिकप्रवर्तनम् आवश्यकं यत् भारतीयशिक्षायाः मूलगर्भः सम्यगुपलब्धिः स्यात्। एवं चेत् संस्कृतभाषायाः च वैदिकवाङ्मयस्य च शाश्वतत्वम् पुनः प्राप्तुं शक्यते।

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Published

2026-04-01

How to Cite

[1]
“वैदिकसाहित्यस्य आधुनिक शैक्षिक व्यवस्थायां योगदानम्: एक समीक्षात्मक अध्ययनम्”, JASRAE, vol. 23, no. 2, pp. 680–690, Apr. 2026, doi: 10.29070/c7hsex40.