वैदिक साहित्य एवं नैतिक शिक्षण: भारतीय शिक्षाप्रणालीम् उद्भावनाय विश्लेषणात्मक अवलोकनम्

Authors

  • संध्या मिश्रा रिसर्च स्कॉलर, सनराइज़ यूनिवर्सिटी, अलवर, राजस्थान Author
  • डॉ. रेणु सिंह एसोसिएट प्रोफेसर, संस्कृत विभाग, सनराइज़ यूनिवर्सिटी, अलवर, राजस्थान Author

DOI:

https://doi.org/10.29070/btwtfj61

Keywords:

वैदिकमूल्यानि, मूल्यशिक्षा, पाठ्यक्रमविकासः, शिक्षकप्रशिक्षणम्, समकालीनशिक्षा

Abstract

एषः शोधः वैदिकमूल्याधारितशिक्षायाः समावेशस्य सम्भाव्यता विषयकं विश्लेषणात्मकं अध्ययनम् अस्ति, यत्र भारतस्य समकालीनशिक्षाप्रणाल्यां वैदिकदृष्टेः उपयुक्तत्वं परीक्षणं क्रियते। शिक्षायाः आधुनिकोन्मुखप्रणाली यद्यपि तकनीकीसंपन्ना अस्ति, तथापि मूल्याधारितव्यक्तित्वनिर्माणे स्पष्टं शून्यता दृश्यते। अनेन कारणेन, वैदिकसाहित्ये प्रतिपादितानि यानि आदर्शमूल्यानि – यथा सत्यं, अहिंसा, ब्रह्मचर्यम्, तपः, शीलम्, स्वाध्यायः, आत्मनियमनम् च – तेषां शिक्षायां समावेशनं आवश्यकं मन्यते।

शोधकार्ये द्विविधपद्धतिः उपयुज्यते – प्राचीनवाङ्मयस्य दस्तावेजानां विवेचनम्, तथा समकालीनशिक्षानीतिनिर्देशानां समीक्षणं। शोधस्य प्रमुखविभागेषु वैदिकमूल्यानां स्वभावः, शिक्षायां तेषां समावेशस्य ऐतिहासिकविकासः, वर्तमानपरिप्रेक्ष्ये अस्य प्रयोगिकसंभाव्यता, शिक्षकप्रशिक्षणस्य भूमिका, पाठ्यक्रमसंरचना, तथा डिजिटलमाध्यमेषु मूल्यशिक्षायाः उपयोगिता सम्यक् प्रकारेण विवेचिता अस्ति।

परिणामरूपेण, शोधे प्रतिपाद्यते यत् वैदिकमूल्यानां शिक्षायां समुचितसङ्गठनं केवलं शैक्षिकप्रदर्शनस्य परिष्काराय न, अपितु राष्ट्रनिर्माणाय अपि अनिवार्यम्। निष्कर्षे सिफारिशाः अपि प्रदत्ताः, यथा शिक्षकप्रशिक्षणम्, पाठ्यक्रमपुनरावलोकनम्, अनुभवाधारितमूल्यशिक्षणम् च।

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Published

2026-07-01

How to Cite

[1]
“वैदिक साहित्य एवं नैतिक शिक्षण: भारतीय शिक्षाप्रणालीम् उद्भावनाय विश्लेषणात्मक अवलोकनम्”, JASRAE, vol. 23, no. 4, pp. 256–265, July 2026, doi: 10.29070/btwtfj61.