वैदिक साहित्य एवं नैतिक शिक्षण: भारतीय शिक्षाप्रणालीम् उद्भावनाय विश्लेषणात्मक अवलोकनम्
DOI:
https://doi.org/10.29070/btwtfj61Keywords:
वैदिकमूल्यानि, मूल्यशिक्षा, पाठ्यक्रमविकासः, शिक्षकप्रशिक्षणम्, समकालीनशिक्षाAbstract
एषः शोधः वैदिकमूल्याधारितशिक्षायाः समावेशस्य सम्भाव्यता विषयकं विश्लेषणात्मकं अध्ययनम् अस्ति, यत्र भारतस्य समकालीनशिक्षाप्रणाल्यां वैदिकदृष्टेः उपयुक्तत्वं परीक्षणं क्रियते। शिक्षायाः आधुनिकोन्मुखप्रणाली यद्यपि तकनीकीसंपन्ना अस्ति, तथापि मूल्याधारितव्यक्तित्वनिर्माणे स्पष्टं शून्यता दृश्यते। अनेन कारणेन, वैदिकसाहित्ये प्रतिपादितानि यानि आदर्शमूल्यानि – यथा सत्यं, अहिंसा, ब्रह्मचर्यम्, तपः, शीलम्, स्वाध्यायः, आत्मनियमनम् च – तेषां शिक्षायां समावेशनं आवश्यकं मन्यते।
शोधकार्ये द्विविधपद्धतिः उपयुज्यते – प्राचीनवाङ्मयस्य दस्तावेजानां विवेचनम्, तथा समकालीनशिक्षानीतिनिर्देशानां समीक्षणं। शोधस्य प्रमुखविभागेषु वैदिकमूल्यानां स्वभावः, शिक्षायां तेषां समावेशस्य ऐतिहासिकविकासः, वर्तमानपरिप्रेक्ष्ये अस्य प्रयोगिकसंभाव्यता, शिक्षकप्रशिक्षणस्य भूमिका, पाठ्यक्रमसंरचना, तथा डिजिटलमाध्यमेषु मूल्यशिक्षायाः उपयोगिता सम्यक् प्रकारेण विवेचिता अस्ति।
परिणामरूपेण, शोधे प्रतिपाद्यते यत् वैदिकमूल्यानां शिक्षायां समुचितसङ्गठनं केवलं शैक्षिकप्रदर्शनस्य परिष्काराय न, अपितु राष्ट्रनिर्माणाय अपि अनिवार्यम्। निष्कर्षे सिफारिशाः अपि प्रदत्ताः, यथा शिक्षकप्रशिक्षणम्, पाठ्यक्रमपुनरावलोकनम्, अनुभवाधारितमूल्यशिक्षणम् च।
Downloads
References
1. UNESCO. (2020). वैश्विक मूल्यशिक्षा प्रतिवेदनम्. पेरिस: संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक संगठन।
2. UNICEF। (2020)। Education for Ethical Development: Global Perspectives। न्यूयॉर्कः यूनिसेफ् प्रकाशनम्।
3. एनसीईआरटी। (2021)। शिक्षणपाठ्यविधिः – पुनरावलोकनप्रतिवेदनम्। नयी दिल्लीः एनसीईआरटी प्रकाशनम्।
4. कुमार, आर. (2020). भारतीय शिक्षामें मूल्य संकट. दिल्ली: राष्ट्रीय प्रकाशन।
5. गोयलः, ए. (2022)। भारतीयशिक्षायाः समस्याः च समाधानानि। नयी दिल्लीः ज्ञानभारतीप्रकाशनम्।
6. गोस्वामीः, आर. (2017). गुरुशिष्य परम्परा: उपनिषदों के आलोक में. कोलकाता: संस्कृत संगम।
7. चतुर्वेदीः, एस. (2022). वैदिक कालीन शिक्षातन्त्र: यज्ञ और नैतिकता का समन्वय. दिल्ली: भारती प्रकाशन।
8. जैन, ए. (2021). चरित्र निर्माण और भारतीय शिक्षादर्शन. भोपाल: भारतीय चिंतन प्रकाशन।
9. तिवारी, क. (2020). शिक्षकप्रशिक्षण एवं मूल्यविकास. भोपाल: भारतीय प्रशिक्षण निकेतन।
10. त्रिपाठीः, वी. (2020). उपनिषदों में आत्मसंयम का स्वरूप. प्रयागराज: वेद विज्ञान परिषद।
11. दत्तात्रेयः, एम. (2021). ऋणत्रय सिद्धान्तः – एक सांस्कृतिक विश्लेषणम्. पुणे: संस्कृतभारती प्रकाशनम्।
12. नारायणः, आर. (2022)। वैदिकमूल्यानां आधुनिकशिक्षायां प्रासंगिकता। वाराणसीः संस्कृतविद्यापीठम्।
13. भारत सरकार। (2020). राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020. नई दिल्ली: शिक्षा मंत्रालय।
14. भारतशासनः। (2020)। राष्ट्रीयशिक्षानीतिः 2020। मानवसंसाधनविकासमंत्रालयः।
15. मिश्र, पी. (2023). गीता, वेद और समकालीन शिक्षा. जयपुर: भारतीय साहित्य अकादमी।
16. मिश्रः, डी. (2021). आत्मविकास और वैदिक शिक्षा. जयपुर: ऋषि साहित्य सदन।
17. मेहता, सु. (2022). भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शिक्षा: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. लखनऊ: वाणी प्रकाशन।
18. राय, प. (2022). डिजिटल युग में छात्रों की नैतिक चेतना. वाराणसी: मानव अध्ययन मंडल।
19. वर्मा, एस. (2019). शिक्षणपद्धतिः एवं नैतिक मूल्यानां क्षीणता. लखनऊ: शिक्षा शोध संस्थान।
20. वर्मा, एस. (2023)। संवादात्मक शिक्षणशैलीया नैतिकशिक्षायाः प्रभावः। जयपुरः नवीनशोधप्रकाशनः।
21. शर्मा, आर. (2019). वैदिक साहित्य में नैतिक शिक्षा. वाराणसी: भारतीय विद्या संस्थान।
22. शर्मा, डी. (2021). वैदिक संस्कृति और शिक्षा व्यवस्था. वाराणसी: संस्कृत विद्यापीठ प्रकाशन।
23. शर्मा, र. (2021). भारतीय विद्यालयों में मूल्यशिक्षा का पतन. दिल्ली: नीतिशास्त्र प्रकाशन।
24. शास्त्रीः, डी.के. (2021)। रामायणमहाभारतयोः पाठ्यपुस्तकानां माध्यमेन पाठ्यक्रमे समावेशः। कोलकाता विश्वविद्यालयः संस्कृतविभागः।
25. शुक्लः, एन. (2018). सेवा भावना: वैदिक दृष्टिकोण से. लखनऊ: मानव मूल्य प्रतिष्ठान।
26. शुक्लः, पी. (2021)। सत्यस्य स्वरूपं वैदिकसाहित्ये। लखनऊः विद्या प्रेस्।
27. सिन्हा, एम. (2023)। डिजिटल शिक्षायां नैतिकमूल्यानां सम्भाव्यता। पटना विश्वविद्यालयः शिक्षाविभागः।






